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Sonia Goyal

Drama Romance


4.5  

Sonia Goyal

Drama Romance


काश

काश

7 mins 212 7 mins 212

राजीव दिल्ली से लखनऊ जाने के लिए ट्रेन में बैठा था। उसके सामने वाली सीट पर एक अधेड़ उम्र की औरत आकर बैठ गई। राजीव अपने मोबाइल में व्यस्त था। जब गाड़ी एक स्टेशन पर रूकी तो राजीव ने अपना ध्यान मोबाइल से हटाकर बाहर की तरफ किया।

          स्टेशन के बाहर काफी चहल-पहल थी। कुछ मुसाफिर सफ़र के लिए निकल रहे थे तो कुछ अपनी मंजिल पर पहुंच चुके थे। रेहड़ी वाले कोई चाय बेच रहा था तो कोई खाने की चीजें। राजीव ट्रेन में बैठा ये सब देख रहा था।

         कुछ समय बाद जब गाड़ी फिर से चली तो वह अपने मोबाइल में व्यस्त होने ही लगा था कि अचानक उसकी नज़र सामने बैठी उस अधेड़ उम्र की औरत पर गई और उसकी नज़र उसी पर ठहर गई। पर उसने उस औरत को नजरंदाज कर दिया और फिर से अपने मोबाइल में व्यस्त होने की कोशिश करने लगा। काफी कोशिशों के बाद भी उसका ध्यान मोबाइल में न लगा तो हारकर उसने मोबाइल अपनी जेब में रख लिया।

         वो औरत भी काफी देर से राजीव को देख रही थी। कुछ समय बाद वो बोली,"कैसे हो राजीव??"

राजीव:- मैं ठीक हूं। तुम कैसी हो शालिनी??

शालिनी:- मैं भी अच्छी हूं। मुझे तो लगा तुमने मुझे पहचाना ही नहीं।

राजीव:- ऐसा कैसे हो सकता है कि मैं अपनी काॅलेज की सबसे अच्छी दोस्त को न पहचानूं।

शालिनी:- अच्छा जी सबसे अच्छी दोस्त.... अगर ऐसा है तो फिर मुझे देखकर नजरंदाज क्यूं कर दिया??

राजीव (हंसते हुए):- मुझे लगा पता नहीं तुम इस बूढ़े को पहचानोगी या नहीं। अगर तुम मुझे न पहचानती तो आस-पास की जनता तो तुम्हें छेड़ने के आरोप में सजाए पिटाई दे देती।

शालिनी (हंसते हुए):- क्या राजीव तुम इतने वर्षों में बिल्कुल भी नहीं बदले।

राजीव:- बदली तो तुम भी नहीं। अभी भी वैसी ही हो।

शालिनी:- अच्छा ये सब छोड़ो। ये बताओ अचानक कहां गायब हो गए थे तुम न कोई खबर की??

राजीव:- कुछ नहीं बस मेरी नौकरी दूसरे शहर में लग गई थी तो मुझे वो शहर छोड़ना पड़ा।

शालिनी:- अच्छा और अब क्या करते हो और कहां रहते हो??

राजीव:- अब तो भई नौकरी से रिटायर हो चुका हूं और घर पर ही होता हूं दिल्ली में।

शालिनी:- चलो अच्छी बात है और इधर कहां जा रहे हो??

राजीव:- मैं लखनऊ जा रहा हूं अपने बहू बेटे से मिलने।

शालिनी:- अच्छा और तुम्हारी बीवी नहीं आई तुम्हारे साथ??

राजीव:- आई है ना।

शालिनी (चारों तरफ नजर घुमाकर देखते हुए):- कहां है वो मुझे तो दिख नहीं रही।

राजीव:- यही तो बात है कि वो किसी को भी दिखती नहीं। बस हमेशा मेरे साथ रहती है।

शालिनी (अफसोस करते हुए):- ये सब कैसे हुआ राजीव??

राजीव:- बस पिछले साल उसे दिल का दौरा पड़ा और वो दुनिया को अलविदा कह गई। अच्छा कब से मेरे बारे में ही पूछ रही हो खुद के बारे में भी बताओ कुछ कि क्या करती हो कहां रहती हो??

शालिनी:- मैं तो बस गृहिणी बनकर घर ही संभालती हूं। तुम्हें तो पता ही है कि अभी तो हमारी काॅलेज की पढ़ाई भी पूरी नहीं हुई थी कि मेरी शादी हो गई थी। पतिदेव फौज से रिटायर्ड है और उनके इलावा घर में बेटा बहू और पोता है। एक बेटी है उसकी शादी हो गई।

राजीव:- चलो अच्छी बात है और इधर कहां से आ रही हो??

शालिनी:- बस दिल्ली रिश्तेदार की शादी में आई थी। अब वापिस जा रही हूं।

राजीव:- अच्छा।

शालिनी:- हम्म... (फिर कुछ सोचते हुए) काॅलेज के भी क्या दिन थे ना राजीव।

राजीव:- सही कहा तुमने।

          इतना कहकर राजीव चुप हो गया और काॅलेज की यादों में खो गया। राजीव ने बारहवीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद पास ही काॅलेज में दाखिला लिया था। काॅलेज के पहले ही दिन उसकी दोस्ती राज से हुई।

        दोनों ने खूब बातें की और क्लास के समय दोनों क्लास रूम में चले गए। पहला लेक्चर प्रोफेसर अनुराग का था। वो हिन्दी के प्रोफेसर थे। सर ने आते ही सबसे उनका परिचय लिया। अभी परिचय चल ही रहा था कि क्लास रूम के दरवाज़े से किसी की मीठी कोयल सी आवाज आई, "सर क्या मैं अंदर आ सकती हूं??"

प्रोफेसर अनुराग:- आइए आइए मोहतरमा। क्या बात आप आज प्रथम दिन ही देरी से आई है, क्या नाम है आपका??

शालिनी:- सर मेरा नाम शालिनी है। सर देरी से आने के लिए माफी चाहती हूं। यकीन मानिए आज के बाद कभी ऐसा नहीं होगा।

प्रोफेसर अनुराग:- ठीक है। जाइए अपने स्थान के लिए प्रस्थान कीजिए।

शालिनी:- धन्यवाद सर।

           राजीव तो शालिनी की इतनी मीठी आवाज़ में खो ही गया। उसके दोस्त राज ने उसे होश में लाया। जैसे ही राजीव अपने ख्यालों से बाहर आया तो उसने एक नज़र शालिनी की तरफ देखा।

           शालिनी की बड़ी-बड़ी आंखें, गुलाब की पंखुड़ियों जैसे गुलाबी होंठ, काले लम्बे घने बाल राजीव को पहली नजर में ही उसका दीवाना बना गए। राजीव का उससे बात करने का मन किया। पर शालिनी पता नहीं उसके बारे में क्या सोचे इस बात से वह चुप रह गया।

              धीरे-धीरे काॅलेज से घर वापिस जाने का समय नजदीक आता गया। राजीव का आज घर जाने का बिल्कुल भी मन नहीं था। वो चाहता था कि वो शालिनी को अपने पास बिठाकर बस उसे देखता ही रहे।

             पर ख्वाबों और हकीकत में फर्क होता है। देखते-ही-देखते काॅलेज का समय पूरा हुआ और शालिनी अपने घर चली गई। राजीव भी घर वापिस आ गया पर उसका दिल अभी भी सिर्फ शालिनी के बारे में ही सोच रहा था। जैसे-तैसे करके राजीव ने रात निकाली और अगले दिन काॅलेज चला गया।

            ये ही राजीव का नित्य कर्म बन गया। काॅलेज में चोरी-चोरी शालिनी को देखते रहना और घर आकर उसके ख्यालों में खोये रहना। अब राजीव सोचने लगा कि शालिनी से दोस्ती कैसे की जाए और आखिरकार एक दिन ये चमत्कार भी हो ही गया।

         एक दिन प्रोफेसर अनुराग ने सभी विद्यार्थियों को एक प्रोजेक्ट पर काम करने के लिए दिया। इस काम के लिए उन्होंने सभी विद्यार्थियों की दो-दो की जोड़ी बनाई। राजीव को जब अपने पार्टनर का नाम पता चला तो उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। क्यूंकि राजीव का पार्टनर कोई और नहीं बल्कि शालिनी बनी थी।

          राजीव सोचने लगा कि चलो अच्छा है कम से कम इसी बहाने शालिनी ज्यादा समय मेरे साथ तो रहेगी ही और हुआ भी यही। पहले-पहल तो शालिनी राजीव से बात करने में हिचकिचाती थी पर राजीव के मजाकिया स्वभाव के कारण धीरे-धीरे शालिनी उससे घुल मिल गई और दोनों की अच्छी दोस्ती हो गई।

        अब राजीव, शालिनी, राज और शालिनी की सहेली दिव्या काॅलेज में सारा समय एक साथ ही बिताते थे। काॅलेज में भी उनकी दोस्ती के चर्चे थे।

         राजीव शालिनी को अपने दिल की बात बताने के बारे में सोचता रहता कि आखिर कैसे वो अपने दिल की बात शालिनी से कहे। धीरे-धीरे राजीव का शालिनी के बिना रहना मुश्किल होने लगा और उसने सोच लिया कि अब तो वह शालिनी को अपने दिल की बात बताकर ही रहेगा।

         अगले दिन सुबह काॅलेज जाकर वो शालिनी के आने का इंतजार करने लगा। शालिनी के आते ही राजीव ने राज और दिव्या के सामने ही शालिनी से कहा.....

राजीव:- शालिनी मैं तुमसे कुछ जरूरी बात करना चाहता हूं।

शालिनी:- राजीव मैं भी तुम सबको कुछ जरूरी बात बताना चाहती हूं।

राजीव:- अच्छा तो पहले तुम ही बताओ कि क्या बात है??

         शालिनी अपने तीनों दोस्तों राजीव, राज और दिव्या को‌ कार्ड देती हुई बोली.....

शालिनी:- ये मेरी शादी का कार्ड है। पंद्रह दिन बाद मेरी शादी है। तुम तीनों को जरूर आना है।

         ये सुनकर राजीव तो वहीं के वहीं स्थिर हो गया। फिर हिम्मत करके बोला.....

राजीव:- शादी...... पर अचानक कैसे तुमने इस बारे में पहले कुछ बताया भी नहीं और अभी तो तुम्हारी पढ़ाई भी पूरी नहीं हुई।

शालिनी:- बस मौसी जी ने रिश्ता बताया कि लड़का फौज में है। पिताजी को लड़का पसंद आ गया और मेरी शादी तय कर दी।

राजीव:- और तुम्हारी पढ़ाई का क्या??

शालिनी:- उन्होंने कहा है कि शादी के बाद वही पर वो मेरी पढ़ाई भी पूरी करवा देंगे।

             उसकी बात सुनकर राजीव चुप हो गया। फिर राज और दिव्या उसको शादी की बधाइयां देने लगे। राजीव मन ही मन सोचने लगा....

राजीव:- मेरी मोहब्बत तो शुरू होने से पहले ही खत्म हो गई।

          राजीव अभी अपनी ही पुरानी दुनिया में खोया था कि अचानक शालिनी की आवाज उसके कानों में गूंजी....

शालिनी:- कहां खो गए राजीव??

        उसकी बात सुनकर राजीव वर्तमान में लौट आया और शालिनी से बोला.....

राजीव:- कुछ नहीं बस काॅलेज के दिनों को याद कर रहा था।

शालिनी:- अच्छा। चलो मेरा स्टेशन आ गया मैं चलती हूं।

राजीव:- अच्छा ठीक है।

शालिनी:- अपना मोबाइल नंबर तो दे दो। इतने वर्षों बाद मेरा पुराना दोस्त मिला है कम से कम उससे फोन पर ही बात कर लिया करूंगी।

         राजीव उसे अपना नंबर दे देता है। नंबर लेकर शालिनी वहां से चली जाती है। उसके जाने के बाद राजीव खुद से कहता है.....

राजीव:- काश! मैंने पहले ही शालिनी को अपने दिल की बात बताई होती तो शायद आज कहानी कुछ और होती। पर अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत।

          ये बोलकर राजीव फिर से अपने मोबाइल में व्यस्त हो जाता है।

           



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