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Khushbu Rani

Drama Romance Classics

4  

Khushbu Rani

Drama Romance Classics

जब मैंने उसे सच में देखा

जब मैंने उसे सच में देखा

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मेरा नाम माया है। एक माँ होने के नाते मुझे हमेशा लगता था कि मैं अपने सात साल के बेटे, आरव, के बारे में सब कुछ जानती हूँ। मुझे पता था उसे खाने में क्या पसंद है, उसे कौन सा कार्टून अच्छा लगता है और उसे अंधेरे से डर लगता है। लेकिन मुझे यह नहीं पता था कि उसके नन्हे से दिल के अंदर भावनाओं का कितना बड़ा समंदर हिलोरे लेता है।

एक आम शाम और एक अनसुलझा गुस्सा

बात पिछले महीने की है। आरव स्कूल से लौटा तो उसका चेहरा उतरा हुआ था। वह सीधा अपने कमरे में गया और जोर से दरवाजा बंद कर दिया। जब मैं अंदर गई, तो देखा कि उसने अपनी पसंदीदा खिलौना कार फर्श पर पटक दी थी।

"आरव! यह क्या व्यवहार है? खिलौने क्यों तोड़ रहे हो?" मैंने थोड़े सख्त लहजे में पूछा।

उसने कोई जवाब नहीं दिया, बस अपनी आँखें सिकोड़ लीं और जोर-जोर से सांस लेने लगा। मुझे लगा कि शायद उसे स्कूल में किसी ने कुछ कह दिया है या वह बस जिद्दी हो रहा है। मैंने उसे डांटना शुरू कर दिया, "अगर तुम ऐसे ही बर्ताव करोगे, तो मैं तुम्हारा सारा स्क्रीन टाइम बंद कर दूँगी। चलो, माफी मांगो और इसे उठाओ।"

आरव अचानक जोर से चिल्लाया, "आप कुछ नहीं समझतीं! आप हमेशा बस डांटती हैं!" और वह बिस्तर पर मुंह छिपाकर रोने लगा।

मेरा 'अहसास' वाला पलमेरा 'अहसास' वाला पल

मैं वहीं ठिठक गई। मेरा 'झटपट दिमाग' कह रहा था कि यह अनुशासन का मामला है और मुझे सख्त होना चाहिए। लेकिन तभी मुझे याद आया कि कुछ दिन पहले मैंने बच्चों की भावनाओं पर एक लेख पढ़ा था— 'आहाना और दो दिमाग'। मैंने सोचा, क्या मैं सच में अपने बच्चे को समझने की कोशिश कर रही हूँ, या सिर्फ अपना हुक्म चला रही हूँ?

मैंने एक गहरी सांस ली। मैंने अपनी नाराजगी को एक तरफ रखा और धीरे से उसके बिस्तर के पास जाकर बैठ गई। मैंने उसके बालों को सहलाया और बहुत ही शांत आवाज में कहा, "आरव, मुझे दुख है कि मैंने तुम पर चिल्लाया। क्या तुम मुझे बता सकते हो कि तुम्हारे अंदर कैसा महसूस हो रहा है? क्या वह गुस्सा है, या दुख है, या कुछ और?"

आरव ने धीरे से अपना सिर उठाया। उसकी आँखें लाल थीं। उसने रुंधे गले से कहा, "माँ, आज क्लास में मैम ने सबको अपनी सबसे प्यारी चीज के बारे में बोलने को कहा था। मैंने आपके बारे में बोलना चाहा... पर सब मुझ पर हंसने लगे क्योंकि मैं ठीक से बोल नहीं पाया और अटक गया। मुझे खुद पर बहुत गुस्सा आया।"

जब दो दिल एक हुए

उस पल मुझे बिजली के झटके जैसा महसूस हुआ। जिसे मैं 'बदतमीजी' समझ रही थी, वह दरअसल आरव का खुद पर गुस्सा और शर्मिंदगी थी। वह खिलौना नहीं तोड़ रहा था, वह अपने अंदर के उस शोर को बाहर निकाल रहा था जिसे वह शब्दों में नहीं कह पा रहा था।

मैंने उसे कसकर गले लगा लिया। मैंने कहा, "आरव,का खुद पर गुस्सा और शर्मिंदगी थी। वह खिलौना नहीं तोड़ रहा था, वह अपने अंदर के उस शोर को बाहर निकाल रहा था जिसे वह शब्दों में नहीं कह पा रहा था।

मैंने उसे कसकर गले लगा लिया। मैंने कहा, "आरव, आई एम सॉरी। मुझे नहीं पता था कि मेरा बेटा इतना बड़ा बोझ उठाकर घर आया है। तुम्हें पता है, जब मुझे बहुत गुस्सा आता है, तो मेरा भी मन करता है कि मैं कुछ पटक दूँ। यह सामान्य है। लेकिन क्या तुम्हें पता है कि हमारे पास एक सुपरपावर है?"

आरव ने अपनी सिसकियाँ रोककर पूछा, "सुपरपावर? कैसी सुपरपावर?"

मैंने उसे समझाया, "हमारे पास दो दिमाग हैं। एक जो कहता है 'अभी गुस्सा करो' और दूसरा जो कहता है 'रुको और सोचो'। जब तुम अटक गए और बच्चे हंसे, तो तुम्हारे पहले दिमाग ने तुमसे कहा कि तुम बुरे हो। लेकिन अगर तुम दूसरे दिमाग की सुनते, तो वह कहता कि 'आरव, तुम अपनी माँ से प्यार करते हो, यह सबसे बड़ी बात है, कोई हंसे तो क्या हुआ'।"

बदलाव की शुरुआत

उस शाम हमने बहुत देर तक बातें कीं। हमने एक खेल शुरू किया— 'इमोशन मीटर'। अब जब भी आरव को गुस्सा आता है, वह चिल्लाने के बजाय कहता है, "माँ, मेरा इमोशन मीटर रेड (लाल) पर है, मुझे कुछ देर अकेला छोड़ दीजिए या मुझे गले लगा लीजिए।"

उस एक पल ने, जब मैंने उसे डांटने के बजाय समझने काफैसला किया, हमारा रिश्ता हमेशा के लिए बदल दिया। मैंने सीखा कि एक माता-पिता के रूप में मेरा काम सिर्फ बच्चे को सुधारना नहीं, बल्कि उसके जज्बातों का साथी बनना है।

अब आरव को अपनी भावनाओं से डर नहीं लगता। उसने अपने गुस्से को काबू करना सीख लिया है, और मैंने अपने बच्चे की खामोशी को पढ़ना। आज जब मैं उसे मुस्कुराते हुए देखती हूँ, तो मुझे अहसास होता है कि 'समझदारी' ही वह धागा है जो दो पीढ़ियों को मजबूती से जोड़ता है।


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