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Shagufta Quazi

Drama

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Shagufta Quazi

Drama

फ़ासला

फ़ासला

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लॉन की मख़मली हरी घांस पर पंछी जाने कब से एक ही जगह बैठा था। एक जगह बैठना पंछियों का गुण नहीं। वे तो इधर-उधर फुदकते, आकाश में स्वच्छंद उड़ान भरते हैं।रश्मि उस पर नज़र रखे हुए थी। तभी उसकी नज़र बिल्ली पर पड़ी, जो पंछी से कुछ ही दूरी पर घात लगाए बैठी थी। वह समझ गई अगर पंछी पल में नहीं उड़ा तो बिल्ली अवश्य ही उसे अपना शिकार बनाएगी। सुबह-सुबह वह मासूम पंछी बिल्ली का नाश्ता बन जाएगा।

    

यह सोच उसके क़दम पंछी की तरफ़ बढ़े।रश्मि पंछी को हाथ से छू कर उड़ाने का प्रयास करने लगी, किंतु वह टस से मस न हुआ। उसे शंका हुई। कहीं उसे कोई चोट तो नहीं लगी। अब वह उसके सुंदर पंखों को प्यार से हौले-हौले सहलाने लगी। मन में शंका उठी, सोचा कुछ समय उसे घर के अंदर रख लेती हूँ। जब वह उड़ान भरने लगेगा उसे आज़ाद कर दूंगी। किंतु उसका वात्सल्य भरा स्पर्श पाकर वह उड़कर कंपाउंड की दीवार पर जा बैठा। उसने इधर-उधर नज़र डाली, बिल्ली उसे कहीं नज़र न आई। वह निश्चिंत थी कि, अब वह आकाश में उड़ते अपने साथियों संग हो लेगा।

     

किंतु पलक झपकते ही बिल्ली जाने कहां से उस दीवार पर छलांग लगा, एक ही वार में झपट्टा मारकर पंछी को मुंह में दबा भाग खड़ी हुई।               

     

रश्मि अवाक सी स्तब्ध खड़ी, जिंदगी और मौत के बीच के फ़ासले को नापने लगी।


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