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Rajeev Rawat

Inspirational


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Rajeev Rawat

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एक पत्र सैनिकों के नाम

एक पत्र सैनिकों के नाम

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मेरे भारत देश के जाबांज सैनिको

आप सभी को बड़े भाई होने के नाते सभी को जीवन की दीर्घायु के लिए आशिर्वाद एवं आप सभी को विजयदिवस की शुभकामनाएं

           आज मैं आपको एक साधारण प्रशस्ति पत्र नहीं लिख रहा हूं। न जाने कितने पत्र तुम्हारी वीरता का बखान करते लिखे गये, कितने सारे देशवासियों ने अपने दिल से निकले अहसासों को शब्द देकर आपको नमन किया तथा शहीद सैनिकों को अश्रुपूरित श्रद्धांजलि दी लेकिन मैं तुम्हारी वीरता की याद दिलाकर या शब्दिक श्रद्धांजलि देकर अपनी ओर से सिर्फ खानापूर्ति नहीं करना चाहता क्योंकि हमारे देश में यह परम्परा रही है कि कुछ भी झूठे आश्वासन देकर, झूठें सपने दिखाकर लोगों का ठगा जाता है।

           हम जानते है कर्त्तव्य के बेदी पर तुम्हारे दृढ़ इरादे , अपने आप को सरहदों पर बलिदान करने की मानसिक दृढ़ता की पराकाष्ठा और अनुशासन के कारण हम बिना किसी बात की चिंता किये शांति भरी सुखमय नींद लेते हैं जबकि आप हर एक पल जाग रहे होते हैं।

           आप संपूर्ण देश को अपना घर समझकर न केबल बाहरी ही नहीं बल्कि आंतरिक दुश्मनों से सुरक्षित करते है, साथ साथ प्राकृतिक आपदाओं में भी अपना तन - मन लगा का श्रेष्ठतम कार्य का प्रदर्शन करते हैं।

        बर्फ से शरीर का रक्त जमाती हुई ठंड में सियाचीन, लेह, लद्दाख, काश्मीर और पंजाब की सरहदों पर आप अपने तन की परवाह न करते हुए बहादुरी से न केवल जमे हुए हैं बल्कि दुश्मनों के छद्म युद्ध का जबाव देते हुए और उनके द्वारा थोपे जा रहे युद्ध सेअपनी मातृभूमि की रक्षा में सतत लगे हुए हैं और आपका अनुशासन कितना प्रशंसनीय है कि अगर चाहें तो आप कुछ दिनों में दुश्मनों को उनके घर में मार सकते है जैसे ऊरी में किया था लेकिन फिर भी बिना आदेश के दुश्मन की गोली और गोले भी खाते रहते हैं।

       जब भी प्राकृतिक आपदाएं आयीं, चाहे तूफान हों, भारी बारिश का सैलाव हो या भूकम्प हों, जहां जहां हमारे देश के नागरिक फंसे और मौत उनको अपने आगोश में लेने के आगे बढ़ी, तब तब आप और आपके सैनिक साथी चट्टान बन कर मौत और जिंदगी के बीच आकर अपने जीवन को दांव पर लगाकर भी उनको बचाने के लिए जीवन रक्षक भगवान बन गये।

          आतंकवादियों, जिनका कोई धर्म, कोई देश और कोई जाति, दृष्टिकोण नहीं होता सिर्फ अपने कलुषित इरादों से मानव और मानवता को लक्ष्य बनाकर नष्ट करना ही ध्येय होता है, उनको इस देश में नरसंहार करने से रोकने में न जाने आपके कितने साथियों ने अपनी जान बिना डरे-सहमे और अपने बढ़ते कदमों को रोके बिना दे दी और मिशन दर मिशन लगे रहे।

          काश्मीर में तो धैर्य की पराकाष्ठा की हद कर दी जब अनुशासन में बंधे आपके साथियों ने पत्थरों के एवज में हथियार नहीं चलाये बल्कि उन भटके हुए लोगों को अपना मानते हुए राष्ट्रीय विचारधारा में लाने में सहयोग देकर मानवता के प्रतीक बन गये।

               आपके समस्त कामों के लिए सिर्फ नमन करना या धन्यवाद करना बहुत छोटे शब्द हैं क्योंकि शब्दों के भ्रम जाल में किसी को कुछ पलों के लिए खुशी तो मिल सकती है लेकिन भविष्य उज्जवल नहीं हो सकता।

         लेकिन मैं जो यह पत्र लिख रहा हूं, वह आपकी बहादुरी और देश भक्ति के लिए धन्यवाद के लिए नहीं बल्कि अपनी अक्षमता पर, अपनी शर्मिदगी पर लिख रहा हूं।जब देश पर जान देने वाले सैनिकों को अपनी पेंशन की समानता के लिए आंदोलन करना पड़ता है।

                 जब शहीद के शरीर को हम जोरशोर से सलामी देते हैं और घोषणायें करते है और उस कार्य में आपके त्याग की कम, अपनी नेतागिरी को चमकाने के अधिक लालसा होती है और आश्चर्य कि नेताओं के स्मारक सजने संबारने पर हजारों करोड़ों खर्च करते हैं लेकिन सैनिकों की कब्रों या समाधियाँ जानवरों के हवाले होती हैं।

            तब जब आपकी पत्नी और पुत्र आपके शहीद होने पर दर दर की ठोकरें खाते हैं और परिवार पेंशन, फंड और नौकरी की लिए भटकता है और हमारे यहां से दुत्कार मिलती है।

         तब जब आपकी जमीन पर गांव के दबंग कब्जा कर लेते हैं और आपके बुजुर्ग आफिसों के चक्कर लगाते है और आप बेवसी में अपने को फंसा पाते और तब जब आप सरहदों पर हमारे लिए खड़े रहते हैं लेकिन आपके परिवार की सुरक्षा के लिए हम शिखंडी बने रहते हैं।किस किस बात के लिए माफी मांगू, यह नेता जो शस्त्रों के बारे में जानते नहीं है, ये नेता रक्षामंत्री जो आपकी तुंरत या भविष्य की आवश्यकताओं की जानकारी नहीं रखते और जो हथियारों की दलाली खाकर आपके और देश के साथ गद्दारी करते हैं और किसी प्रकार की परिस्थितियों में अपनी जिम्मेदारी से मुकर कर आपकी गलती निकालते हैं और हम मूक दर्शक होकर देखते रहते हैं।

          आज मैं आपसे अपने शिखंडीपन के लिए माफी मांगता हूं और आपसे एक वायदा करता हूं कि अब हम आपके लिए, आपके साथ वैसे ही खड़े रहेगें जैसे सरहद पर आप हमारे लिए खड़े हैं ताकि आप निश्चिंत होकर अपने कार्य को अंजाम देते रहें।

आपको और आपके समस्त परिवार को नव बर्ष की हार्दिक शुभकामनायें और आपके जीवन की दीर्घायु की कामना सहित।

                   


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