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Archana Tiwary

Drama


4  

Archana Tiwary

Drama


दुआओं का असर

दुआओं का असर

4 mins 261 4 mins 261

पति के जाने के बाद माला बहुत अकेलापन महसूस करती थी। उसकी अपनी कोई संतान न थी। नाते रिश्तेदार सब अपनी अपनी जिंदगी में व्यस्त थे। जब अकेलापन काटने दौड़ता तो अपनी दीदी से बात कर मन हल्का कर लेती थी। 

पिछले तीन दिन से जिस फ्लैट में वह रहती थी उसके मालिक का फोन आ रहा था कि अब आपको यह फ्लैट खाली करनी पड़ेगी क्योंकि हमने यह फ्लैट किसी को बेच दिया है। माला सोच में पड़ गई क़ि अब इस बुढ़ापे में वह कहाँ जाएगी? इस फ्लैट में वह पिछले बीस सालों से रहती थी। कई बार पति से अपना घर लेने की बात की थी पर वे दोनों अच्छी तरह से जानते थे कि इतनी कम आमदनी में मुंबई जैसे महानगर में घर खरीदना बहुत मुश्किल है। एक दिन बिना उसे परेशान किए अचानक चुपचाप वे इस दुनिया में उसे अकेला छोड़ कर चले जाएंगे यह कभी उसने सोचा न था। पति के जाने के बाद भाई ने कहा था कि मुंबई छोड़कर मेरे पास आ जाओ पर भाई की भी नौकरी कोई खास अच्छी न थी और आमदनी सीमित। उस पर से चार बच्चों का गुजारा करना उसके लिए भी मुश्किल था ऐसे में वह उन पर बोझ बनना नहीं चाहती थी।

ॉआज बड़ी असमंजस में थी किसे मदद के लिए बुलाए ?इतने बड़े शहर में कौन उसकी मदद करेगा ?  इसी चिंता में वह दिन भी आ गया जब मकान मालिक अपने चार गार्ड के साथ घर खाली करवाने आया। माला ने विनती की और दो दिन का समय माँगा। वह घर खरीदने वाले का नाम जानना चाहती थी ताकि उनसे विनती कर घर में फिर से रह सके। उसने मकान मालिक से घर खरीदने वाले को बुलाने के लिए कहा। थोड़ी ही देर में एक नौजवान अपनी चमचमाती कार से वहाँ पहुँचा। वहाँआकर उसने माला को देखा और एक पेपर मकान मालिक के गार्ड को दिखाया। गार्ड ने पेपर मकान मालिक को दी। पेपर देखते हैं मकान मालिक ने गार्ड को वहाँ से हटने के लिए कहा और माला की तरफ बढ़ते हुए कहा- "अम्मा, अब आपको यह घर खाली करने की जरूरत नहीं है, यह घर अब आपका है"।  

माला कुछ समझ न पायी। कभी मकान मालिक को देखती तो कभी उस नौजवान को। उसकी आंखों से आंसू छलक पड़े। तभी उस नौजवान ने आगे बढ़कर माला के पैर छूते हुए कहा-" अम्मा आपको याद नहीं यह पंद्रह साल पहले की बात है। एक बार आप अपने पति के साथ कार से कहीं जा रही थी। चौराहे पर जब आपकी कार रुकी तो मैं भीख मांगते हुए आपके पास आया था। तब मेरी उम्र लगभग दस बारह साल की थी। जब मैंने आपसे कुछ खाने के लिए पैसे मांगे तो आपके पति ने पैसे देने से मना किया था। उन्होंने कहा था ये पैसे लेकर कुछ गलत काम करेगा इसलिए ऐसे लोगों को पैसे मत दो पर आप ने चुपके से उनकी नजर बचाकर अपने पर्स के सारे पैसे मुझे दे दिए और साथ में सोने का एक लॉकेट देते हुए यह कहा कि यह मेरा लकी चार्म है अब से ये तुम्हारा लकी चार्म बनेगा।इस तरह भीख मत मांगो। ईश्वर ने तुम्हें इतना सुंदर शरीर दिया है। मेहनत करके कुछ कमाओ"। आपकी बातें मुझे बहुत अच्छी लगी। तब मैंने आपका नाम पूछा था। आपने अपना नाम बताया और वहाँ से चली गई। मैंने घर जाकर निर्णय लिया कि अब मैं मन लगाकर पढूंगा और आपके दिए ये पैसे कुछ नेक काम में लगाऊंगा। मैंने खूब पढ़ाई की और अपना व्यवसाय शुरू किया। धीरे-धीरे मेरी मेहनत रंग लाई और आज मैं इस शहर का एक जाना माना बिल्डर बन गया हूँ। मैंने आपको ढूंढने की बहुत कोशिश की। एक दिन इंटरनेट पर ढूंढते हुए बिकने वाले फ्लैट की सूची में आपका नाम दिख गया। मैंने वह फ्लैट खरीद लिया। यहाँ आपको देख मुझे बहुत खुशी हुई। आज से ये घर आपका है। आप यहाँ आराम से रहिए और किसी भी चीज की जरूरत हो तो बेझिझक अपने इस बेटे को याद कीजिएगा। यह आपकी उन दुआओं का ही असर है जिसने मेरी जिंदगी को एक नया मोड़ दिया।  माला एकटक उसे देख रही थी। आंखों से बहते आंसू अब भी दुआओं के सागर से छलक रही थी। उसने आगे बढ़ कर उसे गले लगा लिया।


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