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Khushbu Rani

Children Stories Drama Classics

4  

Khushbu Rani

Children Stories Drama Classics

दिमागों की जंग

दिमागों की जंग

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# मेरी सुपरपावर: दो दिमागों की जंग

दस साल की अवनी एक बहुत ही होनहार लड़की थी, लेकिन उसके साथ एक अजीब समस्या थी। उसे लगता था कि उसके सिर के अंदर दो अलग-अलग लोग रहते हैं। एक था **'झटपट दिमाग'**, जो हमेशा कहता, "जो मन में आए अभी कर डालो!" और दूसरा था **'धीमा दिमाग'**, जो बड़े प्यार से समझाता, "रुको अवनी, पहले सोचो तो सही।"

अक्सर 'झटपट दिमाग' ही जीत जाता था, जिसकी वजह से अवनी को स्कूल और घर में डांट खानी पड़ती थी। पर उसे नहीं पता था कि एक दिन यही 'धीमा दिमाग' उसकी सबसे बड़ी सुपरपावर बन जाएगा।

### वह खास दिन

मुजफ्फरपुर के उसके छोटे से स्कूल में उस दिन बहुत हलचल थी। 'सालाना कला प्रदर्शनी' होने वाली थी और अवनी ने पिछले एक महीने से एक बहुत ही खास पेंटिंग बनाई थी। वह पेंटिंग उसके लिए सिर्फ एक चित्र नहीं थी, बल्कि उसके सपनों का एक टुकड़ा थी। उसने उसमें नीले आकाश, सुनहरी धूप और एक छोटी सी चिड़िया को उड़ते हुए दिखाया था।

प्रदर्शनी शुरू होने में सिर्फ आधा घंटा बचा था। अवनी अपनी पेंटिंग को डेस्क पर रखकर पानी पीने बाहर गई। जब वह वापस आई, तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई।

उसकी सुंदर पेंटिंग पर किसी ने काला स्याही का डिब्बा पलट दिया था। उसकी पूरी मेहनत एक काले धब्बे में बदल चुकी थी।

### अंदर का तूफान

जैसे ही अवनी ने यह देखा, उसके **'झटपट दिमाग'** ने शोर मचाना शुरू कर दिया। उसने चिल्लाकर कहा, *"देखो अवनी! तुम्हारी मेहनत बर्बाद हो गई। यह पक्का समीर ने किया होगा, वह हमेशा तुमसे चिढ़ता है। जाओ, उसकी डेस्क पर रखी मिट्टी की मूर्ति तोड़ दो! बदला लो! रोना शुरू करो ताकि सबको पता चले तुम कितनी दुखी हो!"*

अवनी का चेहरा गुस्से से तमतमा उठा। उसकी मुट्ठियाँ भिंच गईं और उसकी आँखों में आँसू आ गए। उसने पास पड़ी एक कैंची उठाई और समीर की ओर बढ़ने ही वाली थी कि तभी... उसके अंदर से एक बहुत ही शांत और धीमी आवाज़ आई।

यह उसका **'धीमा दिमाग'** था। उसने कहा, *"रुको अवनी! एक गहरी साँस लो। क्या तुम्हें यकीन है कि यह समीर ने ही किया है? अगर तुम उसका काम खराब करोगी, तो क्या तुम्हारी पेंटिंग ठीक हो जाएगी? रुक जाओ... सोचो।"*

### सुपरपावर का इस्तेमाल

अवनी वहीं ठिठक गई। उसने अपनी आँखें बंद कीं और लंबी साँस ली। उसने मन ही मन 'एक से दस' तक गिनती गिनी। जैसे-जैसे गिनती बढ़ी, उसका गुस्सा धीरे-धीरे शांत होने लगा। उसने अपनी 'सुपरपावर' का इस्तेमाल किया था— **रुकने और सोचने की ताकत।**

उसने कैंची नीचे रख दी और मुड़कर अपनी खराब हो चुकी पेंटिंग को देखा। उसका 'धीमा दिमाग' अब उसे रास्ता दिखा रहा था। उसने सोचा, *"क्या मैं इस काले धब्बे को कुछ और बना सकती हूँ?"*

उसने तुरंत अपने ब्रश उठाए। जहाँ काला रंग फैला था, उसे उसने एक गहरे काले बादल का रूप दे दिया। फिर उसने सफेद रंग से उस बादल के बीच में चमकती हुई बिजली बनाई। उसने दिखाया कि कैसे एक छोटी सी चिड़िया उस भयंकर तूफान और काले बादलों के बीच से रास्ता बनाकर उड़ रही है।

### जीत और सीख

जब जज प्रदर्शनी में आए, तो वे अवनी की पेंटिंग के सामने रुक गए। उन्होंने कहा, "वाह! यह पेंटिंग कितनी प्रेरणादायक है। यह दिखाती है कि मुश्किलों के काले बादलों के बीच भी उम्मीद की उड़ान भरी जा सकती है।"

अवनी को पहला पुरस्कार मिला। जब वह स्टेज पर ट्रॉफी लेने गई, तो उसने देखा कि समीर कोने में खड़ा रो रहा था। उसे पता चला कि समीर दौड़ते समय गलती से टकरा गया था और स्याही गिर गई थी। वह इतना डर गया था कि माफी भी नहीं मांग पाया।

अवनी समीर के पास गई और कहा, "कोई बात नहीं समीर, मुझे पता है तुमने जानबूझकर नहीं किया।" समीर ने हैरान होकर उसे देखा। उसे यकीन नहीं था कि अवनी उसे माफ कर देगी।

उस दिन अवनी को समझ आया कि उसकी असली सुपरपावर गुस्सा करना या बदला लेना नहीं है। उसकी असली ताकत तो अपने **जज्बातों को समझना और सही चुनाव करना** है। वह जान गई थी कि जब हम रुककर सोचते हैं, तो हम मुश्किलों को भी खूबसूरती में बदल सकते हैं।



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