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हरि शंकर गोयल "श्री हरि"

Horror Crime Thriller

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हरि शंकर गोयल "श्री हरि"

Horror Crime Thriller

ब्लैक रोज

ब्लैक रोज

7 mins
354

भाग 7 


सलीम के मरने की खबर पल भर में पूरे देश में फैल गई । सारे न्यूज चैनल चीखने चिल्लाने लगे "मशहूर समाज सेवी सलीम की अचानक मौत ! पूरा देश इस मौत पर हैरान है । हमारे विश्वस्त सूत्र इसे हत्या बता रहे हैं । ब्लैक रोज का सलीम के शरीर पर मिलना उनकी हत्या होने का संदेह व्यक्त कर रहा है । आजकल ब्लैक रोज हत्याओं का प्रतीक बन चुका है । इससे पहले भी ब्लैक रोज दो हत्याऐं और कर चुका है लेकिन सरकार तथा पुलिस ने इन हत्याओं पर संवेदनशीलता नहीं दिखाई । यदि सरकार और पुलिस समय पर तत्परता से कार्यवाही करती तो सलीम साहब की जान बच सकती थी । सलीम की मौत सरकार और पुलिस की लापरवाही का परिणाम है । 


यद्यपि सलीम के शरीर पर चोट के कोई निशान नहीं मिले हैं लेकिन उसकी अचानक मृत्यु पुलिस के लिए एक रहस्य बन गई है । सलीम के बॉडीगार्ड, जो उनके साथ मौके पर ही था, ने बताया कि सलीम किसी काम से दिल्ली जा रहे थे । रात आठ बजे की ट्रेन थी इसलिए वे रात को पौने आठ बजे मुम्बई सेन्ट्रल रेल्वे स्टेशन पर आ गये थे और फर्स्ट क्लास वाले वेटिंग हॉल में अपनी गाड़ी तूफान मेल का वेट कर रहे थे । वे लघुशंका के लिए टॉयलेट गये और उनके टॉयलेट में घुसते ही अचानक एक चीख टॉयलेट की ओर से सुनाई दी । बॉडीगार्ड आगे बता रहा था कि जब वह वहां पहुंचा तो सलीम साहब नीचे फर्श पर बेहोश पड़े थे । उसने लोगों की मदद से उन्हें टॉयलेट से बाहर निकाला और फिर एम्बुलेंस से उन्हें "वॉकहर्ड" अस्पताल ले जाया गया जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया है । पुलिस शीघ्र ही लाश का पोस्टमॉर्टम करवायेगी तब पता चलेगा कि सलीम की मृत्यु कैसे हुई थी" ? 


इस प्रकार समस्त न्यूज चैनल्स पर सलीम की मृत्यु की खबर ब्रेकिंग न्यूज के रूप में चलने लगी । न्यूज चैनल्स द्वारा सलीम को महान समाज सेवी बताया जा रहा था । उसके कसीदे पढ़े जा रहे थे । उन "कसीदों" को सुनकर कोई भी मुरदा फिर से जी सकता था । टेलीविजन पर न्यूज रिपोर्टर ऐसे ऐसे लोगों को ढूंढ ढूंढकर दिखा रहे थे जिन्हें सलीम ने ई किसी जमाने में आर्थिक मदद की थी । एक व्यक्ति अरशद कह रहा था 

"सलीम साहब देवता आदमी थे । उनकी दयालुता का वर्णन मैं किस मुंह से करूं" । बेचारे दर्शकों के पास क्या विकल्प है ? जी मैं तो आया कि कह दूं , जिस मुंह से खाते हो उसी से बक भी दो" । पर दर्शक चुपचाप बैठे रहे । 

न्यूज चैनल्स आगे कहने लगे "एक दिन मैं फुटपाथ पर बैठा हुआ ठंड से अकड़ रहा था । इतने में सलीम साहब आये और मुझे एक नया कंबल दे गये । कसम से ऐसे नेक बंदे आजकल मिलते कहां हैं ? अगर किसी ने उनकी हत्या की है तो मैं कड़े शब्दों में इसकी निंदा करता हूं । भगवान उन्हें स्वर्ग में स्थान प्रदान करें" । 


न्यूज चैनल्स पर सलीम साहब की दयालुता और महानता के कसीदे पढ़े जाने लगे । किस तरह एक गरीब लड़का बांग्लादेश से अवैध रूप से मुम्बई आया और फिर वह यहीं का होकर रह गया । उसने मुम्बई को ही अपना मुकद्दर बना लिया । सलीम साहब काम क्या करते थे यह आज तक किसी को पता नहीं चला है मगर उन्होंने बहुत सारे लोगों को उपकृत किया है , यह बात जग जाहिर है । आइये, कुछ ऐसे ही लोगों से हम आपको मिलवाते हैं । 


और उस चैनल ने एक महिला तबस्सुम का साक्षात्कार करते हुए उससे पूछा 

आपका नाम ? 

तबस्सुम 

कहां रहती हो 

धारावी स्लम में 

सलीम साहब ने आपकी मदद कैसे की ? 

हम लोग बाग्लादेशी हैं । हमारे पास रहने का कोई ठौर ठिकाना नहीं था । हम लोग दर दर भटक रहे थे । एक दिन किसी दूसरे बांग्लादेशी ने बताया कि सलीम भाई भी बांग्लादेशी ही हैं और वे बांग्लादेशियों की भरपूर मदद करते हैं । तब एक दिन मैं अपने आठ बच्चों को लेकर सलीम भाई के पास गई और रो रोकर अपना दुख सुनाया और अपने आठ बच्चों की दुहाई देकर उनसे मदद के रूप में रहने की जगह मांगी । वे हम बांग्लादेशियों पर इतने दयालु थे कि मेरी पुकार पर तुरंत पसीज गये और उन्होंने अपने एक आदमी को कहा कि यह अपनी ही खाला हैं इसे एक मकान दिलवा दो । 

वह आदमी मुझे अपनी बड़ी सी गाड़ी में बिठाकर धारावी स्लम एरिया में ले आया और एक मकान के सामने जाकर उसने मकान का दरवाजा खटखटाया। उसमें से एक आदमी बाहर निकला । इतने में मेरे साथ आये आदमी ने उस मकान वाले के सिर पर पिस्तौल तान दी और कहा "तुरंत यह घर खाली कर दो नहीं तो सबकी खोपड़ी उड़ा दूंगा" । 

"क्या नाम था उस मकान वाले का" ? 

"नाम तो अब याद नहीं है लेकिन ये पता है कि वह एक काफिर था" 


"काफिर" शब्द सुनकर न्यूज रिपोर्टर के चेहरे से हवाइयां उड़ने लगीं । वह जिसका महिमामंडन कर रहा था , वह तो दूसरे लोगों को काफिर समझता है । लेकिन अब क्या हो सकता था ? अब तो तीर कमान से छूट चुका था । जनता सब कुछ देख रही थी और सुन भी रही थी । बात उलटी नहीं पड़ जाये इसलिए वह बात बदलते हुए बोला 

"और आपकी क्या मदद की सलीम साहब ने" ? 

"हमें वह मकान और उसमें रखा सारा सामान मिल गया । हमें और क्या चाहिये ? सलीम भाईजान का यह अहसान मैं जिन्दगी भर नहीं भूलूंगी । सलीम भाईजान हमारे लिए तो खुदा की तरह थे । वे बहुत नेक इंसान थे । अल्लाह ताला उन्हें जन्नत बख्शे"। 

इस प्रकार कुछ और लोग भी दिखाए गये जो सलीम के कसीदे पढ़ रहे थे । न्यूज रिपोर्टर चीख चीखकर सलीम साहब के गुणगान कर रहा था । वह एक एक कर बहुत सारे लोगों को दिखा भी रहा था जो सलीम की महानता के किस्से बता रहे थे । तबस्सुम के साक्षात्कार के पश्चात न्यूज रिपोर्टर सावधान हो गये थे । लगता था कि अब इन लोगों को पहले ही बता दिया गया था कि उन्हें क्या बोलना है और क्या नहीं ? जिस तरह तबस्सुम ने मासूमियत से सारी बातें जस की तस बता दी थीं तो इससे उस न्यूज रिपोर्टर की नौकरी चली गई थी । चैनल के मालिक ने उसे तुरंत नौकरी से निकाल दिया था । उसकी गलती सिर्फ इतनी थी कि उसने पहले ऑफ द रिकॉर्ड तबस्सुम का साक्षात्कार नहीं लिया था । उसके साक्षात्कार से पहले उसे तबस्सुम को बताना चाहिए था कि कैमरे के आगे क्या बोलना है और क्या नहीं ? उसने बगैर तैयारी के उसका साक्षात्कार प्रसारित करवा दिया इससे उस चैनल की सारी पोल पट्टी खुल गई और जनता में उसकी थू थू होने लगी । 


जनता कहने लगी कि ये न्यूज चैनल्स वाले पैसों के लिए कितना गिरेंगे ? जिस सलीम ने 50 से अधिक मर्डर किये थे । दसियों लड़कियों से बलात्कार किया था । लूट , डकैती, हफ्ता वसूली की अनेक घटनाऐं तो पुलिस ने दर्ज ही नहीं की थी फिर भी उसके खिलाफ 100 से अधिक एफ आई आर दर्ज थीं जिनमें आज तक एक भी फैसला नहीं हुआ था । किसी किसी केस को तो बीस बीस साल हो चुके थे मगर आज तक उनमें किसी गवाह के बयान तक नहीं हुए थे । 


जनता का कहना है कि यदि इन चैनल वालों को किसी का साक्षात्कार दिखाना ही है तो उन परिवार वालों का साक्षात्कार दिखाते जिनके किसी सदस्य की सलीम ने हत्या की थी या जिनकी बेटियों से उसने बलात्कार किया था । उनसे कहलवाते कि सलीम कितना दुष्ट, निर्दयी, दुराचारी था । लेकिन ये तो उनके साक्षात्कार दिखा रहे हैं जिनको लूटे हुए रुपयों में से उसने कुछ मदद की थी । लोग उस चैनल को धिक्कारने लगे । पर न्यूज चैनल्स का तो एक ही दीन ईमान है और वह है पैसा । पैसा ही माई बाप है, पैसा ही खुदा है, भगवान है और पैसा ही सब कुछ है इनके लिए । इसके अलावा बाकी कुछ नहीं है । 


एक दो चैनल्स जनता की आवाज भी दिखा रहे थे । जनता कह रही थी "जल्लाद था सलीम । वह हत्यारा, लुटेरा , बलात्कारी था । मर गया तो बहुत अच्छा हुआ । जो काम पुलिस और न्यायपालिका को करना चाहिए था वह काम "ब्लैक रोज" ने कर दिया । लगता है भगवान ने पुलिस और न्याय व्यवस्था से तंग आकर "ब्लैक रोज" को इस धरती पर भेजा है । सलीम जैसे दुष्टों को मारकर वह बहुत पुण्य का काम कर रहा है । ईश्वर उस पर सदैव अपनी कृपा बनाये रखे" । 


जितने मुंह उतनी बातें । लेकिन सलीम के खिलाफ खुलकर बोलने की हिम्मत करने वाले ज्यादा लोग नहीं थे, कुछ गिने चुने ही थे जबकि सलीम के पक्ष में बोलने वाले बहुत सारे लोग थे । क्या नेता, क्या मीडिया और क्या स्वयं सेवी संगठन । सब लोग पुलिस और सरकार को कोसने में लग गये । सलीम की मौत पर प्रधान मंत्री से जवाब मांगा जाने लगा जैसे कि सलीम कोई बहुत बड़ा देशभक्त हो जिसकी हत्या प्रधान मंत्री ने कर दी हो । ऐसा वातावरण बना दिया कि विपक्ष ने संसद ठप्प कर दी और स्वयं सेवी संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट पर दबाव बनाया कि वह स्वत: संज्ञान लेकर इस पर कड़ी कार्यवाही करे । 


क्रमश: 


श्री हरि 



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