Reetu Singh Rawat

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Reetu Singh Rawat

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भारत की गरीबी की कहानी

भारत की गरीबी की कहानी

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भारत की गरीबी की कहानी कुछ साल में शुरू नही हुई है यह तब शुरू हुई जब भारत को आजादी तो मिल गई पर गरीबो को आजादी के नाम पर सिर्फ सिर्फ मेहनत करके दो वक़्त की रोटी और उनकी मेहनत की कमाई से पूंजीपति और नेता अपनी तिजोरी भर रहे थे और जब तिजोरी भर गई तो मेरे देश का पैसा जो इनकी तिजोरियों बाहर निकलने लगा तो इन सब ने चोरी से कमाया धन विदेशों में भेजकर इस देश और देशवासियों को गरीब और विदेशियों को अमीर बनाया क्योंकि चोर कभी भी पैसा अपने पास नहीं रखता है यह आप सब जानते है और भारत की जो दशा हुई है उस का जिम्मेदार यही लोग हैं जिन्होंने अपने फायदे के लिए भारत की मासूम जनता के साथ ये घिनौना खेल खेला आप सब जानते हैं पर कह नही सकते डर के मारे क्या ऐसा लोग भारत का भला कर सकते हैं जो घर का माल चोरी करके दूसरे के यहां रख रहे है कभी आपने सुना है कि चोर का माल किसी ने वापिस किया हो मैंने तो नहीं सुना अगर हमारी भलाई ये चाहते हो इस पैसे का सदुपयोग इस देश मे करके खुद और देश को उचाईयो तक पहुंचा सकते थे पर आज तक कोई नही चाहता कि इस देश की तरक्की हो हमें तो एक ही काम आता कि छोटी छोटी बातों पर लड़ते रहे इन बातों से अंजान रहें कि इस देश को कैसे सक्षम बनाना है पर नहीं पर किसी न किसी बातो में उलझे रहना है इसी को अपनी जीत समझ रहे है यही हमारा दुर्भाग्य है और इस देश में भी जिन्होने अपने ही घर को लूट कर दूसरों का घर भरा अब हमें कब समझ आएगी कि हम अपना ही नुकसान कर रहे है जिंन्दगी तो एक बार ही मिलती हैं मरने के बाद भी गाली खाते रहो या मर कर भी जिंदा रहो अमर वो होता है जिसको दिल से याद हमेशा किया जाता है वो नही जिसको साल में नाम के लिए जिंदा रखा जाता हैं वो तो जिंदा होते हुए भी मरा हुआ था ,बस सोचने की बात है दोस्तों, कि जिंदा रहना है या मर जाना है समझो तो एक नई शुरुआत हैं नहीं तो कौन इस धरती पर हमेशा के लिए रहने आए हैं कुछ तो अच्छा कर लो अगर ईश्वर ने कुछ करने का मौका दिया है तो, नही तो तुम ही जानो क्योंकि हम चोरी कर कर के अपने से भी बड़ा चोर बना देते हैं आज हम भारत का भविष्य है और आने वाली पीढ़ी जो कल का भविष्य है उसको क्या सीखा कर और क्या उसके हाथों में सौप कर जाएगें क्या धरती माँ और जन्मदाता माँ की कोख का कर्ज़ यही चुकाना है तो हमारे जन्म से मरण तक उनकी आँखों में आंसू है और धरती माँ की गोद में एक बोझ है धरती माँ पर बोझ नही उसका सर गर्व से ऊंचा करना है यही वीर पुत्रों की पहचान है जय हिंद जय भारत !


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