Sheela Sharma

Drama


4.1  

Sheela Sharma

Drama


भाग्य का पट

भाग्य का पट

2 mins 240 2 mins 240

इंसान की सोचने समझने की शक्ति से परे जिंदगी कभी-कभी ऐसे अजीबोगरीब खेल दिखाती है कि हैरत होती है ।हमारे करीबी शर्मा जी का परिवार सुख समृद्धिता से जीवन यापन कर रहा था ।बेटा निखिल मल्टीनेशनल कंपनी में उच्च पद पर पदस्थ था बहू शालिन, सुशील बस रिटायरमेंट से पहले बेटी के लिए एक अच्छा रिश्ता मिल जाए इसी तलाश में शर्मा जी व्यस्त थे। कि अचानक घर पर कहर टूट पड़ा।

दो हफ़्ते की ट्रेनिंग के लिए गया निखिल जब वापस लौटा अमेरिका से बुखार से पीड़ित था। थकान से बुखार आ ही जाता है आराम करने से उतर जाएगा ऐसा सोचकर उसके लाए उपहारों को खोलने और देखने की चाहत में घर का माहौल रोजमर्रा की जिंदगी जीने लगा ।दो-तीन दिन बाद जब बुखार के साथ सांस में भी तकलीफ होने लगी ।तब उसे अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ा जहां से वह कभी वापस नहीं आया।

अभी कुछ समझ पाते कि पूरा परिवार संक्रमित हो गया कोविद19से। घर के मुखिया शर्मा जी भी इसी की गोद में समा गए। पीछे रह गए रोते बिलखते उनकी पत्नी, बहू ,उसकी दोनों बेटियां ,और निखिल की बहन ।पार्थिव शरीरों को कंधा देने वाला भी कोई नहीं ।

उनकी यादों से ज्यादा मां के दिमाग में बस एक ही बात घूम रही थी ।जब बेटे की शादी की बात चली थी ।तब शर्मा जी ने निखिल को बार-बार समझाया था पढ़ी लिखी नौकरी वाली, कदम से कदम मिलाकर चलने वाली लड़की पसंद करो। पर निखिल की इच्छा थी गांव की भोली भाली लड़की के साथ जीवन यापन की शहर की लड़की वहां का माहौल उसे पसंद नहीं था ।

संपूर्ण जगत जब इस बीमारी से जकड़ा हुआ है तो वह असहाय बेबस माँ जगत से बाहर खुले आकाश की ओर ताकते ,आंचल फैलाकर मानों ईश्वर से पूछ रही है क्या इसी दिन के लिए निखिल ने यह निर्णय लिया था ? या इसे भाग्य की विडंबना कहूं ?


Rate this content
Log in

More hindi story from Sheela Sharma

Similar hindi story from Drama