STORYMIRROR
उबल...
उबल रहे थे हजार...
उबल रहे थे...
“
उबल रहे थे हजार गिले-शिकवे बस उनका इंतजार था़ ; तभी जादू हो गया । उन्होंने मुस्कुराकर नज़रें मिलाई और मैं गूंगा हो गया ।
-- कुमार अशोक
”
186
More hindi quote from ASHOK KUMAR
Download StoryMirror App