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Pradeepti Sharma

Abstract


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Pradeepti Sharma

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ये बारिश

ये बारिश

1 min 207 1 min 207

देख इस झरोके से बारिश को, 

लगा जैसे बुला रही हो मुझे, 

की " ए ! नादान लड़की, 

खोल दे सारी बंदिशें, 

रुस्वा कर हर डर को, 

और झूम इन बूँदों की तरह, 

उमंग से भरी अदाओं, 

और चहकते भावों के साथ, 

ख़ुशी और प्रेम बरसाते हुए, 

भीतर भी, बाहर भी | "



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