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Shakuntla Agarwal

Others


5.0  

Shakuntla Agarwal

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यौवन

यौवन

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जवानी की दहलीज़ पर पाँव पड़ते ही,

उन्मुक्त, मदमस्त खिलता यौवन!

छुई - मुई के जैसा,

हाथ से छूते ही,

सकुचाता, शरमाता यौवन!

पतझड़ में भी, 

गुलाब सा खिलता यौवन!

बरसात की बूँदों सा,

सीप में मोती सा चमकता यौवन!

पूर्णिमा की रात में,

पूरे शबाब पर,

चँद्रमा सा इठलाता यौवन!

मरूस्थल में, बादलों से,

बूँदों के रूप में बरसता यौवन!

बँजर धरती की प्यास बुझाता यौवन!

प्रभात में ओस की बूँदों सा,

पत्तो पर चमकता यौवन!

पनघट पर घूँघट की ओट लिए,

खनकता यौवन!

रहट की आवाज़ पर,

रस घोलता यौवन!

ताँगे में मदमस्त,

घोड़े की टाप लिए,

दौड़ता यौवन!

दौड़ती, फाँदती जवानी में,

सीमा की हदों को लाँघता यौवन!

प्रियतम की आहट मात्र से,

सकुचाता शरमाता यौवन!

जवानी के जोश में,

तेज़ लहरों से,

किनारों को तोड़ता यौवन!

बिन पिए ही नशे में,

झूमता यौवन!

मदमस्त हाथी सा,

झूमता यौवन!

जवानी के जोश में,

होश गँवाता यौवन!

जवानी की मदहोशी में,

ऐसे चूर न हों!

थोड़ा होश भी रख,

इतना मगरूर न हो!

जवानी की ख़ुमारी को,

इस कदर भी मत छाने दे,

"शकुन" लोगों की नज़र में,

नूर बन कर जी,

किरकिरापन ना आने दे!


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