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Devashish Tiwari

Inspirational Others

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Devashish Tiwari

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याद शहीदों की

याद शहीदों की

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मुरझाए फूलों को फिर से खिला रहा है दिल।

आज याद शहीदों की फिर से दिला रहा है दिल।


अहमियत पत्तों को जड़ों की बता रहा है दिल।

हर एक हिंदी को हिन्द से मिला रहा है दिल।


आ जाती है आज भी तिरंगे में लिपटी लाश

बरसों की कोशिशों का यही सिला रहा है दिल।


क्या ज़िक़्र करे कोई सैनिक के दर्दों-ग़म का।

ताउम्र यूँ तो ज़ख़्मों का क़िला रहा है दिल।


क्या ख़बर उसे सरहद पे कब आए दिन रात। 

विशाल चट्टानों को अकेला हिला रहा है दिल।


हर मौसम में करता है निगहबानी हमारी।

हमें पानी ख़ुद को अश्क़ पिला रहा है दिल।


जब एक हो शहीद तो सौ रहते हैं तैयार।

सरपरस्तों का यही सिलसिला रहा है दिल।


कभी तो आँखें खोलकर तू भी आ उजाले में।

ये कहकर सोए जमीर को जगा रहा है दिल।


सैनिकों की ख़ातिर कब जागेंगे हुक़्मरान।

बस इतना ही इस दिल को गिला रहा है दिल।


नहीं कीमत जान की नेताओं की नज़र में।

ऐसी घटिया सोच पे तिलमिला रहा है दिल।


क्या बात तेरी तू रहता है सरहद से लिपट के।

तू अकेला भी दुश्मनों को दहला रहा है दिल।


पानी की जगह सींचता है लहू से वतन को।

तभी तो मेरा हिन्द खिलखिला रहा है दिल।




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