"याद रखो"
"याद रखो"
इस जीवन का स्वाद चखो
बस ये बातें याद रखो
शैशव में अपने पालक का
सदा मान-सम्मान करो
सुप्रभात और शुभ संध्या ही
कहकर सबसे बात करो
दिल दरिया कर लो अपना
जीने का उन्माद रखो
इस जीवन का स्वाद चखो
बस ये बातें याद रखो
स्वच्छ रखो इस काया को-
मन का पावन हो संकल्प
परहित, प्रेम, मनुजता सीखो
नहीं है इसका कोई विकल्प
सोच समझकर सबके आगे
अपनी सच्ची बात रखो
इस जीवन का स्वाद चखो
बस ये बातें याद रखो
अपनी भाषा, अपना देश
सभ्य संस्कृति का उन्मेष
भिन्न रंग और अनुपम वेश
धर्म, जाति का न हो भेद
परस्पर मत प्रतिवाद रखो
इस जीवन का स्वाद चखो
बस ये बातें याद रखो
बड़े बुजुर्गों से बोलो
उनके मन की बात सुनो
कितने प्रेरक कहते किस्से
अपने मन में जरा गुनो
संस्कार के वही सरोवर
चुनकर पारिजात रखो
इस जीवन का स्वाद चखो
बस ये बातें याद रखो
जन-हित साधे, वो है ज्ञानी
स्वार्थ सिद्धि तो है बेमानी
सबके दिल में बस जाए जो
उसकी ही तो बने कहानी
संगम हो साहित्य का जहां
कलम चले, बुनियाद रखो
इस जीवन का स्वाद चखो
बस ये बातें याद रखो
