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Dr.Purnima Rai

Classics Inspirational


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Dr.Purnima Rai

Classics Inspirational


वैशाखी की पावन बेला, मन में प्यार जगाती है।

वैशाखी की पावन बेला, मन में प्यार जगाती है।

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वैशाखी की पावन बेला, मन में प्यार जगाती है। 

नफरत छोड़ो मिलकर बैठो, मन तकरार मिटाती है।।


फसलें ऊँची प्यारी लगती, खेतों में हरियाली है; 

कृषकों के जीवन में आई, देखो आज दीवाली है; 

अन्न देवता के कारण ही, जगती हर घर बाती है।।


युग द्रष्टा युग स्रष्टा गुरु ने, खालस पंथ सजाया था;

 पावन धाम आनन्दपुर में ही, अमृत पान कराया था;

 गुरु मर्यादा गुरु सिक्खी यह, सबके मन को भाती है।।


खूनी साका जलियाँवाला, देखा मन अकुलाया था; 

उजड़ गया था बाग सुनहरा,फूल-फूल मुरझाया था; 

वीर शहीदों की कुर्बानी, हमको याद दिलाती है।।


सुख-वैभव खुशहाली आए, धन-दौलत सौगात मिले; 

नील गगन में दिखे "पूर्णिमा", सोने जैसी रात खिले; 

श्रम उद्यम से किस्मत चमके, वैशाखी बतलाती है।।


तर्ज:फूल तुम्हें भेजा है खत में

 गाओ, खुशी मनाओ घड़ी सुहानी आई है


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