Participate in the 3rd Season of STORYMIRROR SCHOOLS WRITING COMPETITION - the BIGGEST Writing Competition in India for School Students & Teachers and win a 2N/3D holiday trip from Club Mahindra
Participate in the 3rd Season of STORYMIRROR SCHOOLS WRITING COMPETITION - the BIGGEST Writing Competition in India for School Students & Teachers and win a 2N/3D holiday trip from Club Mahindra

Dr J P Baghel

Classics


4  

Dr J P Baghel

Classics


वाह री ! दुनिया

वाह री ! दुनिया

1 min 218 1 min 218

चली दुख दाहने लेकिन 

रही सुख दाह री ! दुनिया 

मुझे ही क्या, किसी को भी 

नहीं परवाह री ! दुनिया 


न साधन पास में जब हों,

मुसीबत हों पहाड़ों-सी ।

जुटाकर एकता के भाव,

भावुकता पहाड़ों-सी ।

निकलती खोजने सुख-शांति 

मिलकर; वाह री ! दुनिया 


न साधन की कमी जब हो, 

कमी तिल की न ताड़ों की ।

बनाती ताड़ ही तिल के, 

धुनें रण के नगाड़ों की ।

उलझती है सुखों में ही,

परस्पर ; वाह री ! दुनिया 


चली दुख दाहने लेकिन, 

रही सुख दाह री ! दुनिया 

वाह री ! दुनिया


Rate this content
Log in

More hindi poem from Dr J P Baghel

Similar hindi poem from Classics