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ritesh deo

Abstract

3  

ritesh deo

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ऊब जाना

ऊब जाना

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उब जाना जब रिश्तों से तो बोझ भी उनका ढोना मत...

जो रह ना पाए फिर उसके बिन तो छुप छुप के तुम रोना मत...

याद अगर फिर भी आए तो, कदम खींच फिर भी, लाएं तो

धैर्य भी अपना खोना मत बस उसके बिन तुम रोना मत...

भूल सको तो भूल ही जाना याद उसको करना मत....

वजह जो पुछे चुप रहने की। तो जिक्र भी उसका करना मत....

बात भी उसकी करना मत, संग भी उसके रहना मत...

पर आ जाए जो पास तुम्हारे । दूर भी उससे रहना मत....

क्या एहसासों को भूल सकोगे ? जो पल तुमने साथ बिताए...

फिर छोटी छोटी कुछ बातों पर अपने रिश्ते खोना मत....


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