Participate in the 3rd Season of STORYMIRROR SCHOOLS WRITING COMPETITION - the BIGGEST Writing Competition in India for School Students & Teachers and win a 2N/3D holiday trip from Club Mahindra
Participate in the 3rd Season of STORYMIRROR SCHOOLS WRITING COMPETITION - the BIGGEST Writing Competition in India for School Students & Teachers and win a 2N/3D holiday trip from Club Mahindra

GOPAL RAM DANSENA

Abstract Inspirational


4  

GOPAL RAM DANSENA

Abstract Inspirational


तू ही मन मित है

तू ही मन मित है

1 min 155 1 min 155

चल रहीं हैं सांसे तो हर कदम जीत है

तेरा साथ मिला हर कदम तू ही मन मित है

खुले आसमान में देखो बादल उड़ते हैं

कोई दूर होता, तो कोई किसी से जुड़ते हैं

सर सर झर झर बारिश के मिलन गीत है

चल रहीं हैं सांसे तो हर कदम जीत है

तेरा साथ मिला हर कदम तू ही मन मित है


भौंरे फूल बहार हरियाली

लचके डाल दे देकर ताली

भान कहां पतझड़ का कि न वो आए

खून क्यों सूखे क्यों न वो आज गाए

बीतेगा जैसे एक गया बीत है ।

चल रहीं हैं सांसे तो हर कदम जीत है

तेरा साथ मिला हर कदम तू ही मन मित है


नैन पुतरी जब अश्क समंदर में डुब जाए

कभी इस तीर कभी उस तीर छटपटाए

तू सोख लेती है आंसू संबल के किरणों से

रास्ता मिलता है उलझन के चंबल बीहड़ों से

तुम हो हमदम मेरे तूने निभाई हर रीत है ।

चल रहीं हैं सांसे तो हर कदम जीत है

तेरा साथ मिला हर कदम तू ही मन मित है



Rate this content
Log in

More hindi poem from GOPAL RAM DANSENA

Similar hindi poem from Abstract