Exclusive FREE session on RIG VEDA for you, Register now!
Exclusive FREE session on RIG VEDA for you, Register now!

अमित प्रेमशंकर

Inspirational


5.0  

अमित प्रेमशंकर

Inspirational


तुमने लहू से सिंचा मुझको

तुमने लहू से सिंचा मुझको

1 min 163 1 min 163

तुमने लहू से सिंचा मुझको

तुमने जगत में लाया है।

तेरे निज कर्मों से मैंने

मानव जीवन पाया है।।


सिंच सिंच बचपन से मुझको

इतना अटल बनाया है।

अस्त्र शस्त्र भी सोचें

दाता कैसा कवच बनाया है।।


कौन ख़ुदा है कहां ख़ुदा है

तुझमें ख़ुदा समाया है।

मेरी ख़ुशी के ख़ातिर तुमने

खुद की खुशी दबाया है।।


पथ प्रदर्शक रहकर मेरे

विदूर नीति समझाया है।

तेरा ऋण न कभी चुके

न अब तक कोई चुकाया है।।


लिखने वाले सब लिखते हैं

तू अम्बर सा साया है।

लेकिन सच में तेरी गाथा

रब भी समझ न पाया है।।


  



Rate this content
Log in

More hindi poem from अमित प्रेमशंकर

Similar hindi poem from Inspirational