Read #1 book on Hinduism and enhance your understanding of ancient Indian history.
Read #1 book on Hinduism and enhance your understanding of ancient Indian history.

Harish Bhatt

Abstract


4  

Harish Bhatt

Abstract


टीस

टीस

1 min 209 1 min 209

नजर उठी भी नहीं थी कि

वह गुजर गए नजदीक से

और लग गया दाग दामन पर

जीने का सलीका भी नहीं है

कैसे समझाता था तुमको मैं

मेरी नजर में तुम थे ही कहां

मौन था मैं और तुम गुजर गए

नहीं रहा मतलब कभी तुमसे

मुझे तो नापने थे कदम तुम्हारे

जो बढ़ रहे थे मंजिल की ओर

तुम्हारी जीत ही मेरा लक्ष्य था

छिप नहीं सकते हैं दाग दामन के

लेकिन ईमानदारी भी कुछ होती है।


Rate this content
Log in

More hindi poem from Harish Bhatt

Similar hindi poem from Abstract