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Shweta Chaturvedi

Romance


4.5  

Shweta Chaturvedi

Romance


ठहरा हुआ पतझड़

ठहरा हुआ पतझड़

1 min 203 1 min 203

ओढ़ के ये आसमाँ 

चाँदनी में खो गयी

खुली पलकों में हाय, 

रात सारी हो गयी...


फिर कहो ना बात कोई, 

जो कभी कहते थे तुम

खुल के मुस्कुराए हुए 

मुद्दतें सी हो गयी ...


फिर खिले ना फूल कोई

ना गुलों से बात हुई,

पतझड़ों में ठहरे जैसे 

पूरी साल हो गयी....


फिर ना मुड़ के देखा कभी

ना ही मुलाक़ात हुई, 

बन गए क्यूँ अजनबी 

ऐसी क्या बात हो गयी....



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