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S Ram Verma

Romance


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S Ram Verma

Romance


सुना था !

सुना था !

1 min 229 1 min 229

सुना था की, 

एक से नहीं रहते हालात, 

एक से नहीं रहते ताल्लुकात, 

एक से नहीं रहते सवालात

एक से नहीं रहते जवाबात !


सुना था की,

एक से नहीं रहते तजुर्बात, 

एक से नहीं रहते दिन-रात, 

एक सी नहीं रहती कायनात, 

एक सिर्फ ऊपर वाले के सिवा

एक सा कोई नहीं रहता यहाँ !


फिर ऐसा क्यों है, 

कि मैं आज भी वैसा ही हूँ,

तेरे लिए जैसा उस पहले दिन था

जिस पहले दिन मैंने तुम्हें देखा था ! 


फिर ऐसा क्यों है, 

कि आज भी दो घड़ी जब तुम, 

नहीं दिखती मुझे तुम तो क्यूँ

मन मेरा बैचैन हो उठता है !


फिर ऐसा क्यों है, 

कि आज भी जिस दिन तुम, 

ना मिलो तो वो दिन गुजरता, 

ही नहीं वैसा जैसा दिन गुजरता है

जब तुम होती हो साथ मेरे !


फिर तुम ही बताओ, 

क्यूँ हूँ मैं आज भी वैसा, 

जैसा था मैं उस दिन जिस 

दिन मैं मिला पहली बार तुमसे !



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