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Sanjay Jain

Abstract


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Sanjay Jain

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संशोधन

संशोधन

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क्या हम संशोधन करे

किस किस को हम बदले।

हो सके तो संशोधन से पहले

खुद को क्यों न बदले।


कितने संशोधन कर चुके

पर कर न सके सोच में सुधार।

हो हल्ला तो सब करते

पर करते नहीं मिलकर विचार।


करो मिलकर समाधान तुम समस्या का 

न कि संशोधन है इसका समाधान।

क्योंकि करके संशोधन क्या पाया है

क्या हकीकत में तूने न्याय दिलाया।


या संशोधन के नाम पर

लोगों को लुभाया है।


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