शीर्षक- अहसास
शीर्षक- अहसास
रिश्तों की उम्र कच्चे धागों सी
नाजुक होती है।
नाजुक रिश्तो को कोमल,
सुखद बहुत प्यार से रखे।
टूटने से जिनके
जिंदगी बिखर जाती हो
उन्हें उलझनों से दूर
रखना ही बेहतर है।
विश्वास की डोर से,
प्यार का छोर बाँध कर देखो।
जिंदगी बहुत ही खूबसूरत है।
क्या बेचकर..
खरीदें तुझे..
ऐ "फुर्सत"..
सब कुछ तो..
गिरवी पड़ा है..
जिम्मेदारी" के बाजार में...
रिश्तों को दिल से निभाएं,
दिमाग लगाएंगे तो सब हार जाएंगे।
