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Supriya Devkar

Romance


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Supriya Devkar

Romance


शाम

शाम

1 min 115 1 min 115

शाम धिरे धिरे गुजर 

अभी संवरना बाकी है

रास्ता तकते है बैठे 

संदेशा आना बाकी है 

नज़रों ने कि है शिकायत 

की दीदार के प्यासे है

उनकी एक झलक से 

रौशन आँगन के चिराग है

मौसम बदल जाता है 

तेरे कदम पड़ते ही

सुकून सा मिल जाता है 

नज़रों से नजर मिलते ही



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