सच्चा दोस्त
सच्चा दोस्त
दोस्त शब्द बड़ा ही औपचारिक हो गया है,
यह शब्द अपना वास्तविक मायने बदलकर
पूर्णतः व्यापारिक हो गया है,
हम हर किसी को दोस्त बोल रहे हैं,जो हमारे थोड़ा भी करीब हैं,
जिन्हें ना हमारी ज़रूरत है और ना ही जिनके बिना हम ग़रीब हैं,
दोस्त वह है जो हमें सही राह दिखलाता है,
दोस्त वह है जो हमारी ख़ामियों को भी अपनाता है,
दोस्त वह है जो हमारी जरूरतें जानता है,
दोस्त वह है जो हमें दिल से अपना मानता है,
दोस्त वह है जो अपने ग़म छिपाकर हमारी खुशियों में शामिल होता है,
दोस्त वह है जो हमारे हर राज़ छिपाने के क़ाबिल होता है,
दोस्त वह है जो अमीरी-गरीबी का भेदभाव नहीं देखता,
दोस्त वह है जो जात-पात का व्यापार नहीं देखता,
दोस्त वह है जो दूर रहकर भी हमें दिल में बसाता है,
दोस्त वह है जो हमें हर मौक़े पर याद आता है,
दोस्ती की इस कसौटी मे कौन खरा उतर पाया है,
वह ख़ुशनसीब है जिसने ऐसा एक भी दोस्त पाया है।
