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Sadhna Mishra

Abstract


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Sadhna Mishra

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सैनिक

सैनिक

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अबकी त्योहारों पर आऊंगा नहीं 

सजन घर आया सुन पाऊंगा नहीं


अम्मा बांध देना लड्डू और मठरी,

बांध देना हाथों से अम्मा एक गठरी।

कौन है जाने फिर रखा पाऊं या नहीं,

खा लो बेटा खा लो सुन पाऊं या नहीं।


अबकी त्योहारों पर आऊंगा नहीं

सजन घर आया सुन पाऊंगा नहीं


बाबू तुम्हारी कलम दिल के पास रखा है ,

जैसे सीने पर तुम्हारा हाथ रखा है।

क्या पता चरण मै छू पाऊँ या नहीं,

आया लाल मेरा सुन पाऊँ या नहीं।


अबकी त्योहारों पर आऊंगा नहीं

सजन घर आया सुन पाऊंगा नहीं


बहन रख देना राखी देखभाल के,

बांध लूंगा उसको मैं खुद संभाल के।

सूनी कलाई लेकर रह पाऊंगा, नहीं,

भैया घर आया सुन पाऊँ या नहीं।


अब की त्योहारों पर आऊंगा नहीं

सजन घर आया सुन पाऊंगा नहीं


सुनो प्यारे भाई हंसी कर दो विदाई,

देखो सरहद से आवाज है आई।

दुश्मन को पीठ दिखाऊंगा नहीं,

वीरा घर आया सुन पाऊँ या नहीं।


अबकी त्योहारों पर आऊंगा नहीं

सजन घर आया सुन पाऊंगा नहीं।


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