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अधिवक्ता संजीव रामपाल मिश्रा बाबा

Abstract


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अधिवक्ता संजीव रामपाल मिश्रा बाबा

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प्यार का एहसास होगा

प्यार का एहसास होगा

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कभी तो समझ आयेगा,

प्यार का एहसास होगा,

तबियते पूछेंगी हाल मेरा,

उल्फतों को नाज होगा।

जिंदगी के फासले दूर होंगे,

जब दिल मिलने को मजबूर होंगे।

जलने लगेंगे चिराग हवाओं से,

वफा जब गिले शिकवे भुलायेगी,

होने लगेगा उजाला उन चिरागों से,

बुझ गये जो आज हवाओं से।



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