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बादल राग

Others


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बादल राग

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प्रेम - दोष

प्रेम - दोष

1 min 172 1 min 172

फूल एक दिन में 

मुरझा जाते हैं

क्यों, क्योंकि इसका 

जीवन एक दिन का है 

नहीं ?...


फूल इंतज़ार में मुरझा जाते हैं

भँवरे की आस में

जिससे वह प्रेम करता है


जानता हूँ मैं,

फूलों के मधुर रस को 

चूस जाते हैं भँवरे

कुछ फूल अपनी तृप्ति

बुझा कर मुक्त हो जाते

कुछ अपने लाज-लिहाज से

और कुछ बचे हुए जलन भाव से


फूलों का प्रेम जिस्मानी है

आखिर कोई क्यों ?

खेलने देगा अपने जिस्म से...


अन्ततः मैं भी तो उससे 

प्रेम करता हूँ

छूकर-चूम कर, कभी-कभी तो

तोड़कर भी



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