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Praveen Gola

Romance


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Praveen Gola

Romance


फिर से हमारी बात

फिर से हमारी बात

1 min 295 1 min 295

तुझे भूलाने की कोशिश में,

मैं हर बार हारती सी गई,

कभी अपने प्यार पर तरस आता,

तो कभी तेरी मजबूरी पर।


कसूर तेरा भी नहीं,

कसूर मेरा भी नहीं,

जब तूने दिया था साथ हमेशा,

तो क्यूँ बनूँ मैं बेवफा?


मगर फिर दिल कहता,

कि क्यूँ करती अब उसका इंतजार?

खत्म कर सब किस्सा यहीं झूठा,

ज़िसे तू अब तक समझती रही प्यार।


लौटेगा वो फिर से यहीं पर,

थोड़ा सब्र तो कर तू ए दिलरूबा,

नई बहार आई है अभी उस पर ,

कैसे जाने देगा उसे वो यूँ भला?


मैं दिल को अब थोड़ा समझाने लगी हूँ,

कहीं और उसे अब लगाने लगी हूँ,

जितने भी पल मैने जिए उसके साथ,

वही कराऐंगे फिर से हमारी बात।।



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