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S Ram Verma

Others


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S Ram Verma

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फिर क्यूँ परेशां हूँ मैं

फिर क्यूँ परेशां हूँ मैं

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सब कुछ तो है,

पास मेरे और है

थोड़ी सी आस भी,

फिर क्यूँ परेशां हूँ मैं !  


सब कुछ तो है,

पास मेरे एक 

छोटी सी ज़िन्दगी,

पाषाण सा तन

और ये शिला सा, 

स्थिर मन भी तो है

फिर क्यूँ परेशां हूँ मैं !  


सब कुछ तो है,

पास मेरे और

हाँ रुकी-रुकी सी, 

सांस भी तो है

फिर क्यूँ परेशां हूँ मैं ! 


सब कुछ तो है,

पास मेरे बस

थोड़ी सी ख़ुशी,

थोड़ा सा सुकून

और थोड़ा सा, 

चैन ही तो नहीं है

फिर क्यूँ परेशां हूँ मैं !


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