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VIVEK ROUSHAN

Abstract


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VIVEK ROUSHAN

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नया था रास्ता

नया था रास्ता

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नए - नए थे ख़्वाब हमारे नया था रास्ता

बहुत दूर तलक साथ मेरे चला था रास्ता


ऐसा भी न था कि मुझे यूँ हीं मिला था रास्ता

पहले मिली थीं मुश्किलें फिर मिला था रास्ता


मिलते हीं जो बिछड़ गया आँख से उतर गया

उस एक़ शख्स ने मेरा बदल दिया था रास्ता


मैं चला जिस राह पर मेरे साथ चली तन्हाईयाँ

सोचता हुँ तन्हा हुआ था मैं या तन्हा था रास्ता


दिल मेरा नाशाद हुआ जख्म भी नासूर बना

बिच सफर में जब मुझे छोड़ गया था रास्ता



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