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Vikrant Kumar

Abstract


4.3  

Vikrant Kumar

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नववर्ष का आगाज़ फिर से...

नववर्ष का आगाज़ फिर से...

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नववर्ष का आगाज फिर से,

उमंग उत्साह का संचार फिर से।


छूट गया जो गत वर्ष,

मान मेहनत में कमीं,

पुनः करें प्रयास फिर से।


सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो,

बढ़े भाईचारा आपस में प्यार हो,

भरे खुशियों के भंडार फिर से।


प्रकृति के दोहन से

फैला जो प्रकोप,

ना करें छेड़छाड़ फिर से।


व्यक्तित्व में निखार हो, 

सेवा और सभ्याचार हो,

करें मानवता का सत्कार फिर से।


ले संकल्प,कर दृढ़ निश्चय,

पहले करें स्वयं में बदलाव,

देखें चमन ए बहार फिर से।


नववर्ष का आगाज फिर से,

उत्साह उमंग का संचार फिर से,

शुभकामनाएं करें स्वीकार फिर से।



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