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नैतिकता का सिद्धांत

नैतिकता का सिद्धांत

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माँ बाप हैं, हमारे जन्मदाता

शिक्षा, संस्कारों, मूल्यों की पाठशाला।

जब तक रहेंगे, वे साथ हमारे

जीवन काव्यमय बने, जैसे मधुशाला।

किताबें सैद्धांतिक रूप से शिक्षा देती

जीवन का अनुभव, कहाँ सिखाती।

मानवता, नैतिकता और सहयोग

कौन माँ बाप से, सुगम राह दिखाती।

माता-पिता की ख्वाहिश रहती

बच्चा उनका सदा, खुशहाल रहे।

कृत्य और समर्पण से अपने

चाहते बच्चे उनके जैसे बनें।

नीतिगत बातें और चरित्र की

शुचिता पर अब, कौन ध्यान देता।

स्वार्थ का जमाना आया, अपना देखो

इंसान अब इस पर ध्यान देता।

माँ बाप ने जिन्हें, चलना सिखाया

दुनिया दिखायी अपने, जीते जी।

नैतिकता, प्रेरणा बना मजाक

बच्चे वृद्धाश्रम दिखा, रहे जीते जी।

सुनने, पढ़ने की रह गयी

नीति और प्रेरणा की बातें।

माँ बाप की कौन सुनता अब

घुटकर बिता रहे, वे दिन व रातें।


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