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Anubhav Srivastava

Inspirational


3  

Anubhav Srivastava

Inspirational


नारी महान है

नारी महान है

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नारी महान है तो सम्मान दीजिये।

अब और नहीं इसका अपमान

कीजिये।।

पेपरों में, किताबों में, नारी महान है।

पल-पल पर छिन रही पर इसकी

मुस्कान है।।

हर रूप रंग में उसे पहचान दीजिये....

‘महिला दिवस’ मना के क्या हाथ आएगा।

सोया है भाग्य क्या जाग पायेगा।।

अरमानों के पंखों को उड़ान दीजिये....


कहने के लिए नारी हीरो की खान है।

वक़्त पर निकलती उसमें जान है।।

इसके कोख की सदा तारीफ़ कीजिये....

मुरझा दिए हवस ने शाखों पर खिले फूल।

अनगिनत बो दिए जीवन में दुखों के शूल।।

वातावरण है दूषित मान लीजिये....


टूटती है चूड़ियाँ अरमान टूटते हैं।

गैरों के भेष में जब अपने लूटते हैं।।

जीते जी इसको मत शमशान दीजिये....

चाहत की इक मिसाल बनी ताजमहल है।

तारे नील गगन से तोड़ने की पहल है।।

हो कामयाब(वो) नारी वरदान दीजिये...


पलकों पर बैठाया, बाहों में झुलाया है।

नारी ने हर क़र्ज़ पल भर में चुकाया है।।

ज़ख्मों के मत इसे नित निशाँ दीजिये....

पूनम के चाँद में ‘सनम’ किसने लगाया दाग।

इसको बना दे ‘कुंती’ वह गया स्वयं भाग।।

पुरुषत्व पर मत इतना गुमान कीजिये।

नारी महान है तो सम्मान दीजिये...


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