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संजय असवाल "नूतन"

Abstract Fantasy

4.7  

संजय असवाल "नूतन"

Abstract Fantasy

मुझे बता देना..

मुझे बता देना..

1 min
20


कहीं गर तुम्हें सुकून मिले 

तो बता देना,

कहीं बिन मेरे चैन मिले तो 

तो बता देना।


कहीं खुशियों की बरसात मिले 

तो बता देना,

कहीं दिल में जज्बात मिले 

तो बता देना।


कहीं आंखों में प्यास मिले 

तो बता देना,

कहीं कोई मुझसे खास मिले 

तो बता देना।


कहीं कोई पुराना प्रेम पत्र मिले 

तो बता देना,

कहीं मेरी खुशबू वाला इत्र मिले 

तो बता देना।


कहीं राहें सुनसान खामोश मिले

तो बता देना,

कहीं फिर से जीने की चाह मिले

तो बता देना।


कहीं हवाओं में सरगम बहे

तो बता देना,

कहीं दिल ए दर्द जख्म मिले

तो बता देना।


कहीं दुआओं में असर मेरी दिखने लगे

तो बता देना,

कहीं दिल में एहसास फिर से जगने लगे

तो बता देना।


कहीं मिलने की फिर चाहत हो

तो बता देना,

कहीं आंखों में ही रात कटने लगे

तो बता देना।


बता देना हर बात मुझे

जब दिल पर बोझ बढ़ने लगे....

बता देना हर बात मुझे

जो आँखों में ख्वाब ठहरने लगे। 


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