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ritesh deo

Abstract

4  

ritesh deo

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मोहब्बत मै हाल सबका

मोहब्बत मै हाल सबका

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दिल का लगाना भी अज़ीब होता है।

दिल करीब चाहता उसे

जो दिल से दूर होता है।

क्यों हैं इतनी ज़मानें की बंदिशें

चाहने वालों का खाना ख़राब होता है।


जात पात ऊंच नीच हर दहलीज से

दिल पार होता है।

आदमी तड़प के रह जाता बस

ज़माने का कड़ा प्रतिकार होता है।

मन हासिल करना चाहता उसे

जो अपने बस में ना इख्तियार होता है।


दिल का लगाना भी अजीब होता है।

तोहमतों की बरीशें हैं

दुनिया भर की शाजिसें हैं

इन सब मुश्किलों से दिल को

पार होना है।

क्या ख़ाक कोई महब्बत किसी से

जब हर किसी को खींचता

रिश्तों का जाल होता है।


नाचता रह जाता बंदा

ना सुर ना ताल होता है।

बस दीवानों सा हाल होता है।

डगमगातें कदम बिन मतलब का

कदम ताल होता है।


देख लिया करके मोहब्बत मैंने भी

इन तूफानों में बिखरता हर

जज़्बात होता है ।

दिल का लगाना नहीं आसान होता है।

बंदा हर वक्त परेशान होता है।


मोहब्बत में हर किसी का यही हाल होता है।

मोहब्बत में हर किसी का यही हाल होता है।


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