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Priti Raghav Chauhan

Tragedy

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Priti Raghav Chauhan

Tragedy

मंदिर मंदिर पंडे बैठे

मंदिर मंदिर पंडे बैठे

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मंदिर मंदिर बैठे पंडे

मंदिर बाहर बैठे वृद्ध

राम ढूंढते वन-वन भटके

घर के ऊपर फिरते गिद्ध 

खुशहाली को खुशी खा गई 

सड़कों पर है बदहाली

दिल्ली से है दूर बहुत 

अब भी जनता की दीवाली

बड़ा समुंदर गोपी चंदर

खेल निगल रही व्हेल

भूखे नंगे करे कब्बडी

ओलम्पिक में फेल 

हर धाम पर कोटि देव 

हर देव के आगे थाली

जाने कहाँ गई मढैया

घर के बाहर वाली

हर मंदिर को स्कूल बना दो

पंडों को दो फिर शिक्षा 

हाथ तुम्हारे जगन्नाथ हैं 

बहुत हो गयी भिक्षा 

लाख ऊँचे हों गुम्बद मीनारें 

इक इक कर ढह जाएंगी

कोटि कोटि शिक्षित जनता ही

भारत का भाग्य बनाएगी।


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