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Rashmi Singhal

Inspirational


3  

Rashmi Singhal

Inspirational


मिट्टी के दीए

मिट्टी के दीए

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ले लो ! दीए,ले लो ! दीए

ले लो ! सुदंर-सुदंर दीए,

ले लो ! मिट्टी के दीए

इस बार दीवाली के लिए

,

हमसे ही तो मिटता है तम,

लाते खुशियाँ भगाते हैं गम,

मिट्टी से है ही हम बनते हैं

मिट्टी में जा मिलते हैं हम,


होते हैं हम बड़े ही पावन,

अँधियारे को करते रोशन,

हममें होती स्वदेशी खुशबु

और होता है जीवन-दर्शन,


अम्बर में तारे टिमटिमाते,

हम धरती पर जगमगाते,

दुर्भाग्य को दूर भगा कर

सौभाग्य को हम बढ़ाते,


शुद्धता की हैं हम पहचान,

मिट्टी से ही हैं हमारे प्राण,

मिल जाते हम मिट्टी में ही

पर्यावरण का रखते ध्यान,


अपने देश के कुम्हार,

माना देते हमें आकार,

खरीदोगे तुम हमें,तभी

मना सकेंगें वे भी,त्यौहार,


विदेशी वस्तुओं में प्यार नहीं

सुंदरता है पर संस्कार नहीं,

बढ़ाओ स्वदेशी रोजगार को

मिलता जिसे बाजार नहीं,


ले लो ! दीए ,ले लो ! दीए

ले लो ! सुंदर-सुंदर दीए,

ले लो ! मिट्टी के दीए

इस बार दीवाली के लिए।


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