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Seema Singhal

Classics


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Seema Singhal

Classics


मित्र

मित्र

1 min 145 1 min 145

दोस्‍त जब कहता है 

मेरे रहते तुम्‍हारा कोई

कुछ नहीं कर पाएगा 


टूटती हुई उम्‍मीद

छूटता हुआ हौसला 

मानो वापस लौट आता है 


दोस्‍त के इन शब्‍दों में 

मन का कोई कोना

दोस्‍ती के इस ज़ज्‍बे पर 

अपना सब कुछ

कुर्बान करना चाहता है 


एक कोई होता है जो

बहुत खास होता है 

कितनी भी दूर हो वो 

सदा दिल के पास होता है 


भीड़ में एक अलग चेहरा 

जो सिर्फ तुम्‍हारी परवाह करता है 

डगमगाते हैं जब भी कदम 

वह आगे बढ़कर सम्‍भाल लेता है 


ये मेरे साथ ही नहीं 

आप सबके साथ होता है 

दोस्‍ती पर जिनको

दिल से विश्‍वास होता है 


उनका दोस्‍त हमेशा

उनके पास होता है !


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