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Archana kochar Sugandha

Abstract


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Archana kochar Sugandha

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मेरी अभिलाषा

मेरी अभिलाषा

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कभी फूल की अभिलाषा को पढ़ा था 

बड़े जतन से जहन में गढ़ा था।


बनना नहीं चाहता मैं पूजा का फूल 

अभिलाषा मेरी बनूँ मैं वीर जवानों के पथ की धूल ।


मेरी अभिलाषा सुनो हे भगवान 

राम बनने से पहले, बनूँ मैं इंसान ।


किसी की जान लेने से पहले बनूँ उसके प्राण 

यम के आने से पहले, वतन पर हो जाऊँ कुर्बान। 


दुश्मन बनाने से पहले भाई का जोड़ लूँ नाता 

शीश नमन हो नारी शक्ति को पत्नी, बहन और माता।


किसी का निवाला हड़पने से पहले उसकी रोटी बन जाऊँ 

बेसहारों के हाथ की सोटी बन जाऊँ।


किसी को बीच रास्ते में भटकाने सेपहले

उसकी राह बन जाऊँ

दुश्मन का दर्द साले उसे

उससे पहले उसके दिल की चाह बन जाऊँ।


मर के जमाना याद करे मेरा नाम 

अर्चना ऐसा कुछ कर जाऊँ काम ।


परमात्मा की देन का मान कर जाऊँ

आत्मा मिले जब परमात्मा में

देह का दान कर जाऊँ।



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