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Vivek Gulati

Abstract Inspirational

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Vivek Gulati

Abstract Inspirational

मेरे सर्वोप्रिय

मेरे सर्वोप्रिय

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जिनके टोकने से होती थी झल्लाहट

उनकी अब आती भी नहीं आहट

कुछ खाया, कुछ पिया.. रखा कर अपना ध्यान

इतने बड़े बच्चे का बाप हूँ, क्या है आपको ज्ञान

तू राजा बन या दादा, रहेगा हमारा सिर्फ बच्चा

कितना भी पढ़ लिख ले, हम तो कहेंगे है अक्ल का कच्चा

ज़्यादा देर ना दिखने पर, पड़ती थी डाँट

उनकी छत्र- छाया में ना धूप लगी ना कभी आँच

आपके बिना शून्य सी हो गई ज़िंदगी

जब से गये, रास नहीं आती वीरांगी।


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