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Neetu Tyagi

Drama


4.8  

Neetu Tyagi

Drama


मैं भी लिखूंगी

मैं भी लिखूंगी

1 min 572 1 min 572

शब्दों के भावों को ढूंढता

फिरता मेरा मन

अपनी कल्पनाओं को लिखने

को आतुर

शब्द ढूंढता मेरा मन।


शब्दों से डरता झिझकता

शरमाता पर भागता मेरा मन

कागज की प्रतीक्षा चातक सी है

कलम की ओस भी सिसकती सी है।


हां, मैं लिखूंगी एक दिन

जिस दिन भाव तोड़ देंगे

सब बांध बह जाएगा अंतरमन

कागज की कश्ती के

तोड़कर सब कगार


जी पाऊंगी मैं भी मन भर

ले कलम की कुछ

स्याही उधार।


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