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Neetu Tyagi

Drama


4.8  

Neetu Tyagi

Drama


मैं भी लिखूंगी

मैं भी लिखूंगी

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शब्दों के भावों को ढूंढता

फिरता मेरा मन

अपनी कल्पनाओं को लिखने

को आतुर

शब्द ढूंढता मेरा मन।


शब्दों से डरता झिझकता

शरमाता पर भागता मेरा मन

कागज की प्रतीक्षा चातक सी है

कलम की ओस भी सिसकती सी है।


हां, मैं लिखूंगी एक दिन

जिस दिन भाव तोड़ देंगे

सब बांध बह जाएगा अंतरमन

कागज की कश्ती के

तोड़कर सब कगार


जी पाऊंगी मैं भी मन भर

ले कलम की कुछ

स्याही उधार।


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