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Vishnu Saboo

Drama Romance Tragedy


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Vishnu Saboo

Drama Romance Tragedy


मासूमियत

मासूमियत

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एक दौर वो भी था कि उसे देखने को तरसते थे,

कभी गलियों में तो कभी बाज़ारों में पीछा करते थे।।

खुशनसीब समझते थे उस दिन को जिस दिन,

उस बैरी चांद को बिना नकाब देख लिया करते थे।।


जिसे भूलने की शिद्दत से कर रहा हूँ कोशिशें,

नसीब रोज किसी बहाने से मिला देता है।।

कभी दिख जाती है उसकी निशानी कोई,

कभी खुद उसे मेरे सामने खड़ा कर देता है।।


साथ रही वो एक अरसा अजनबियों की तरह,

ना कभी दिल लगाया मुझसे न मुझ पे गौर किया।।

अब मुझसे बात करती है वो मासूम की तरह,

सच में मासूम है या मासूमियत का ढोंग किया।।



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