लाल बत्ती

लाल बत्ती

1 min 202 1 min 202

लाल बत्ती देती संकेत

चाहे जीवन गति हो

चाहे ह्रदय गति हो

‌चाहे शीध्र गति हो

रुक जाती संकेतना समझो


दे रही थी संकेत

सिग्नल की लालबत्ती

‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌अप नी लाल रंगीन भाषा में

पर वो ना समझी नादान

कर ही दिया उलंघन उसने


उस दिन महिला दिवस था

वो कुछ जल्दी में थी

जगह जगह मोर्चे थे

रैलियां थी नारी जागृति की

पर वो जागृत ना थी


अचानक हुई एक चीख

सब हो गए थे हतप्रद

सांसें। थम सी गई थी

दिल धड़कने लगे थी

ट्रैफिक जाम हुआ


सड़क पर वो लाश बनी

खून से लथपथ पड़ी थी

लोगों। और पुलिस से घिरी

वो प्यारी सी मूरत थी

हो गई अब विभत्स थी


चारों ओर लहूं विखरा

तेज आती गाड़ी ने रौंदा

दृश्य बड़ा ह्रदय विधायक

कोई चीखा तो कोई रोया

प्रयाण पखेरु उड़ गए थे

उसके हाथों की चूड़ियां

पैरों की छनकती पायल

गले का चमकता मंगलसूत्र

‌‌‌माथे का दमकता सिंदूर

‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌‌सुहागिन लग रही थी


हटो-हटो-हटो

पुलिस की एक गाडी़ आई

‌‌‌उसे उठाकर यूं डाल दिया

मानों इसां नहीं भूसे का बोरा

आंखें बरसी मन उदास हुआ


सड़क पे विखरा सामान

समेटने में सब लगे थे

बच्चे का स्कूल टिफीन था

‌‌‌‌‌‌इतनी बहदवासी में वो थी

सिग्नल की लालबत्ती ना दिखी


यह लालबत्ती ही तो

राहगिरों का जीवनदान है

ना समझो तो मुत्यु दान है

कसूर किसी का भी न था

नासमझी में मौत गले लगी


मन में कई प्रश्न उठे

नहीं वो पागल ना चोर थी

ममयामयी प्यारी मां थी

नादान कहो या मूर्ख कहो

बस ज्ञान ना था 'लालबत्ती'


का प्राणों को मुफ्त में गवां बैठी

‌‌‌‌‌‌कैसी विडम्बना थी

‌‌‌‌यह विडम्बना ही थी

विडम्बना ही।


Rate this content
Log in

More hindi poem from Rati Choubey

Similar hindi poem from Drama