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Nand Kumar

Inspirational


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Nand Kumar

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कुदरत

कुदरत

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कुदरत के है इस जग में,

बड़े करिश्मे सुन्दर न्यारे।

नदियां पर्वत वन उपवन,

बहते झरने अति प्यारे।।


कही धातु है तेल कही,

है कहीं खनिज भण्डार।

पवन वायु जल अन्न दे रही,

है कुदरत सबको उपहार।।


सीमित तत्व पास कुदरत के, 

जान रहा है सब संसार।

फिर भी दोहन करें न सीमित,

सहते सब कुदरत की मार।।


दूषित वायु अन्न जल दूषित, 

दूषित है अब मन भी नर का।

अधिक लाभ के लोभ में आकर,

हुआ व्यर्थ अरमान है सबका ।।


भूकंप बाढ़ सूखा ओले पड़,

बार बार हमको समझाते।

कुदरत का रक्षण हुआ न तो,

फिर जीव सकल ना रह जाते ।।



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