End of Summer Sale for children. Apply code SUMM100 at checkout!
End of Summer Sale for children. Apply code SUMM100 at checkout!

कुछ न कहना

कुछ न कहना

1 min 289 1 min 289

यह जो मेरा हुनर है

तेरे प्यार की चुनर है

यह जो मेरा हुनर है

तेरे प्यार की चुनर है


जब भी यह लहराई है

मैंने प्रेरणा ही पाई है

नई रचनाओं की 

नई वेदनाओं की


नई भावनाओं की

नये जीवन की

नये संघर्ष की


इस प्यार की फुहार को

यूँही बरसाते रहना

यूँही बहारों के जैसे

मुस्कुराते हुए रहना


यूँ ही पहाड़ों के दहानों को

हटाते हुए रहना

यह शीतल पेय झरनों को

यूँ ही लुटाते हुए रहना


यह ज़ुल्फ़ें बरहम को

यूँ ही लहराते हुए रहना

कुछ कह नही पाओ गर

यूँ ही शांत बने तुम रहना


यह प्रेमसुधा का अमृत

यूँ ही पिलाते हुए रहना

यूँ ही कबीर के दोहों सी

तुम गाते हुए रहना


यूँ ही मीरा की भक्ति सी

तुम भक्तिमय रहना

यूँ ही मीर की ग़ज़लों को

तुम सुनाते हुए रहना


यूँ ही गांधी सुभाष अम्बेडकर को

तुम लाते हुए रहना

यूँ ही फिदा हुसैन की चित्रकारी में

रंगों सी तुम रहना


यूँ ही ताजमहल की ईमारत में

संगों सी तुम रहना

यूँ ही ग़ालिब के शायरी में

दर्द बनकर तुम रहना

यूँही बैजू बावरा बन


किसी तानसेन से तुम कहना

कहने को बहुत कुछ है

मग़र अब कुछ न तुम कहना।


Rate this content
Log in

More hindi poem from Amit Kumar

Similar hindi poem from Romance