Vishnu Prasad Dalai

Classics


5.0  

Vishnu Prasad Dalai

Classics


कुछ बातें मन की

कुछ बातें मन की

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अपने दिल के अरमानो को आराम फरमाने दीजिए,

उन जज्बातों को आप अपने काबू में कर लीजिऐ।


मानता हूँ आपकी रूह उसकी आँखों में खो जाती है,

आपका मन भी विचारों की चक्रव्यूह में आपको उलझाती है।


कोशिश करे या ना करें ये भी एक दुविधा है,

कम से कम मित्रता के खातिर बात करने की तो सुविधा है।


वैसे भी वह किसी और के मन की रानी है,

दो पल की बातें उसकी, आपके अंतरमन को छू जानी है।


उसकी एक मुस्कुराहट आपके बेरंग जीवन को रंगीन कर देती है,

उसकी एक झलक मात्र ही आपके मन को उल्लास से भर देती है।


ऐसा प्रतीत होता है मानो वह स्वयं आकर्षण का आईना हो,

आपके निगाहों के समक्ष बस उसके सुनैना हो।


पर यारों यह सब तो काल्पनिक बातें हैं,

आप न जाने क्यों उसके खयालों में मंडराते हैं।


मित्र को मित्र ही रहने दीजिए

दिल को चुप कराकर दिमाग को कहने दीजिए।


जिंदगी बहुत छोटी है मेरे दोस्त, कब तक यूं दुख मनाओगे,

अपनी उस प्रेमिका को आप खुश ही रहने दीजिए।


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