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Sumit Malhotra

Tragedy


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Sumit Malhotra

Tragedy


कोरोना और निर्दोष लोग।

कोरोना और निर्दोष लोग।

1 min 224 1 min 224

दोस्तों कोरोना जैसी महामारी,

खा रही कितनी ज़िंदगी सारी।


क्या था उन निर्दोषों का कसूर,

मार रही है सबको बिना कसूर।


कितने सपने देखे थे परिवारों ने,

चकनाचूर कर डाले महामारी ने।


उन सभी ने कितने सपने देखे थे,

कैसे प्राण छूटते सपने टूट गए थे।


कोरोना के पहले दूसरे स्ट्रेन भारी,

अगला रोकने के लिए करें तैयारी।


रोज-रोज समाचार पढ़ते सुनते हैं,

संसाधन की कमी से लोग मरते हैं।



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