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Akhtar Ali Shah

Tragedy

5.0  

Akhtar Ali Shah

Tragedy

खुशियां बाढ़ ले गई मेरी

खुशियां बाढ़ ले गई मेरी

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जिंदगी में आग भर गई,

मुझको वो तबाह कर गई।

खुशियां बाढ़ ले गयी मेरी,

सारी हसरतें भी मर गई।


मेघ ऐसे बरसे टूटकर,

हो गया था सब इधर उधर।

हर तरफ था पानीपानी बस,

बरखा ढा गई थी वो कहर।


याद तबाही है आज तक,

जिन्दगी में गम वो भर गई।

खुशियां बाढ़ ले गई मेरी,

सारी हसरतें भी मर गई।


घर सभी वीरान हो गए,

दर्द की दुकान हो गए।

अब सिरों पे छत नहीं कोई,

अब सहन प्रधान हो गए।


आसमानी छत को देखकर,

रूहे फलक तक सिहर गई।

खुशियां बाढ़ ले गयी मेरी,

सारी हसरतें भी मर गई।


गाय भैंस बकरियों का धन,

जल में हो गया सभी दफन।

फसलें खेतों की चली गई,

तन हुआ हो जैसे निर्वसन।


कुछ पलों में निर्दयी चमक,

चेहरे से मेरे किधर गई।

खुशियां बाढ़ ले गयी मेरी,

सारी हसरत भी मर गई।


कजरा मेरी आँख का धुला,

आंसुओं की धार में घुला।

स्वाद हो गया है बे मजा,

जब गले हँसी रुदन मिला।


मांग सिंदूरी न हो सकी, 

स्वप्न की मिठास झर गई।

खुशियां बाढ़ ले गई मेरी,

सारी हसरतें भी मर गई।


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