Exclusive FREE session on RIG VEDA for you, Register now!
Exclusive FREE session on RIG VEDA for you, Register now!

Akhtar Ali Shah

Tragedy


5.0  

Akhtar Ali Shah

Tragedy


खुशियां बाढ़ ले गई मेरी

खुशियां बाढ़ ले गई मेरी

1 min 358 1 min 358

जिंदगी में आग भर गई,

मुझको वो तबाह कर गई।

खुशियां बाढ़ ले गयी मेरी,

सारी हसरतें भी मर गई।


मेघ ऐसे बरसे टूटकर,

हो गया था सब इधर उधर।

हर तरफ था पानीपानी बस,

बरखा ढा गई थी वो कहर।


याद तबाही है आज तक,

जिन्दगी में गम वो भर गई।

खुशियां बाढ़ ले गई मेरी,

सारी हसरतें भी मर गई।


घर सभी वीरान हो गए,

दर्द की दुकान हो गए।

अब सिरों पे छत नहीं कोई,

अब सहन प्रधान हो गए।


आसमानी छत को देखकर,

रूहे फलक तक सिहर गई।

खुशियां बाढ़ ले गयी मेरी,

सारी हसरतें भी मर गई।


गाय भैंस बकरियों का धन,

जल में हो गया सभी दफन।

फसलें खेतों की चली गई,

तन हुआ हो जैसे निर्वसन।


कुछ पलों में निर्दयी चमक,

चेहरे से मेरे किधर गई।

खुशियां बाढ़ ले गयी मेरी,

सारी हसरत भी मर गई।


कजरा मेरी आँख का धुला,

आंसुओं की धार में घुला।

स्वाद हो गया है बे मजा,

जब गले हँसी रुदन मिला।


मांग सिंदूरी न हो सकी, 

स्वप्न की मिठास झर गई।

खुशियां बाढ़ ले गई मेरी,

सारी हसरतें भी मर गई।


Rate this content
Log in

More hindi poem from Akhtar Ali Shah

Similar hindi poem from Tragedy